कोर्ट ने पॉलीथिन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से बैन लगा रखा है। लेकिन, अब वह फिर से दुकान से घर और फिर सड़क पर पहुंचती दिखाई दे रही है। जिम्मेदार प्रशासन और नगरपालिका पॉलीथिन के प्रयोग पर अंकुश लगाने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहे हैं।
केंद्र सरकार की पहल पर देशभर में स्वच्छ भारत अभियान चल रहा है, लेकिन तीर्थनगरी में इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिल रहा है। इलाके में कूड़े और गंदगी के ढेर में सबसे ज्यादा प्लास्टिक युक्त कचरा देखने को मिल रहा है। पॉलीथिन पूरी तरह से प्रतिबंधित है। लेकिन ठेली से लेकर बड़े प्रतिष्ठानों में उपभोक्ताओं को सामान पॉलीथिन में दिया जा रहा है। जिसे बाद में खुले में फेंक दिया जाता है।
रस्म अदायगी के लिए पालिका और प्रशासन कुछ दिन अभियान चलाकर शांत बैठ जाते हैं। बकौल, एसडीएम ऋषिकेश कुश्म चौहान नगर में पॉलीथिन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध है, लेकिन ये बात देखने में आई है कि अब भी व्यापारी और लोग पॉलीथिन का उपयोग कर रहे हैं। अभियान चलाने के लिए नगरपालिका को निर्देशित किया जाएगा। पॉलीथिन पूर्ण रूप से बंद हो, इसके लिए व्यापार मंडल और नगर पालिका जल्द संयुक्त रूप से जन जागरुकता अभियान शुरू करेगी।
पॉलीथिन से होने वाले नुकसान
- पॉलीथिन युक्त कचरा गंगा में प्रवाहित होने से पानी दूषित होता है।
- पॉलीथिन पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है। खुले में फेंकने से भूमि की उपजाऊ क्षमता कम होती है। वहीं, जलाने से निकलने वाली विषैली गैस से वायु प्रदूषण का खतरा रहता है।
- पॉलीथिन के जलने से निकले वाली गैस से हृदय संबंधी रोग, टीबी आदि होने की संभावना रहती है।
- सड़क से पॉलीथिन के जमा होने से नालियां और सीवर लाइन भी चोक हो जाती हैं।
पॉलीथिन प्रतिबंधित है। पिछले माह कुछ दुकानों में पॉलीथिन बरामद कर चालान की कार्रवाई भी की गई। नगरपालिका समय-समय पर अभियान चलाती है। दोबारा अभियान चलाकर पॉलीथिन का उपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। - विजय प्रताप सिंह चौहान, ईओ नगर पालिका ऋषिकेश।