फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिंदा है अपनों के मिलने की उम्मीद

Sat, 13 May 2017 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ऋषिकेश।
विज्ञापन
2013 की आपदा में लापता अपनों की तलाश में तीर्थनगरी पहुंचे यात्री लापता परिजनों की फोटो दिखाते हुए। - फोटो : amarujala
विज्ञापन
उत्तराखंड में 2013 में आई जल प्रलय के घाव अब भी हरे हैं। आपदा में लापता हुए लोगों के परिजनों की अपने प्रियजनों के लौट आने की उम्मीद अभी टूटी नहीं है। इस साल की चारधाम यात्रा में मध्य प्रदेश का चार सदस्यीय दल आपदा में गुम हुए अपने घर के सदस्यों, रिश्तेदारों की तलाश में उत्तराखंड पहुंचा है।
विज्ञापन



वह यात्रा मार्गों पर उनकी तलाश करेंगे, लोगों को खोये परिजनों के फोटो दिखाकर उनके बारे में जानकारी लेंगे। इसके अलावा केदार बाबा के दरबार में लोगों की कुशलता और जल्द लौटने की अर्जी लगाएंगे। मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी येंद्र राठौर उर्फ दिनेश अपनी बहन संगीता परमार, जीजा अजय परमार व रिश्तेदार पंकज गहलौत के साथ शुक्रवार को तीर्थनगरी पहुंचे हैं।


येंद्र राठौर ने बताया कि वह या उनके रिश्तेदार आपदा के बाद से लापता लोगों की तलाश में तब से अब तक लगभग हर साल उत्तराखंड आते हैं। उनके माता शांता देवी राठौर, मौसी पुष्पा गहलौत व मौसा बृजमोहन गहलौत समेत रिश्तेदारों का दस सदस्यीय दल वर्ष 2013 में यात्रा पर आया था, लेकिन इनमें से कोई सदस्य वापस नहीं लौटा।
विज्ञापन



येंद्र ने बताया कि 15 जून-2013 को आखिरी बार मां शांता राठौर व मौसा बृजमोहन गहलौत से  बहन की फोन पर बात हुई थी। उस वक्त दल के सदस्य गौरीकुंड से केदारनाथ की यात्रा पर रवाना हो रहे थे। इसके बाद से उनके परिजन लापता है। लापता परिजनों की तलाश में मध्य प्रदेश से 15 लोगों का दल उनकी खोजबीन में उत्तराखंड आया था, लेकिन उनका कहीं कोई पता नहीं चला।


आपदा के दौरान लापता हुई राजस्थान की एक महिला के वर्ष 2015 में गंगोत्री रूट पर मिलने की जानकारी  मिलने के बाद 2015 में येंद्र के छोटे भाई शैलेंद्र राठौर इस उम्मीद में खोये यात्री दल की तलाश में उत्तराखंड आए कि शायद उनके प्रियजन भी उन्हें मिल जाएं, लेकिन कोई नहीं मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें