अभी तक पर्यटन के लिहाज से तीर्थनगरी आने वाले विदेशी पर्यटकों को अब हिंदी संगीत भी खूब भा रहा है। लक्ष्मणझूला-स्वर्गाश्रम घूमने आ रहे विदेशी पर्यटकों को कैफों और ढाबों में बैठकर भारतीय संगीत गुनगुनाते देखा जा सकता है। बात चाहे गिटार की हो या फिर बांसुरी की, उनका सुर-लय और ताल काबिलेतारीफ है।
लक्ष्मणझूला स्थित ट्री कैफे में हिंदी संगीत गुनगुना रहे इटली निवासी निस्कल ने बताया कि वर्ष 2010 में जब वह पहली बार तीर्थनगरी घूमने आए तो उन्होंने यहां हिंदी गाने सुने। जो मेरे दिलोदिमाग को छू गया। बस फिर क्या था, मैंने ठान लिया कि मैं भी हिंदी संगीत सीखूंगा। मैंने फौरन करीब 35 हजार रुपये का गिटार खरीदा और हिंदी संगीत सीखने लगे। हालांकि इसमें थोड़ा वक्त जरूर लगा। लेकिन, अब मैं दम मारो दम, मिट जाए गम...., मेरा वचन भारत माता को तेरा शीश नहीं झुकने देंगे... जैसे गीतों को गिटार के माध्यम से लोगों को सुनाता हूं। इसमें मुझे काफी सुकून मिलता है।
हिंदी डिक्शनरी से मिली मदद
बकौल, निस्कल हिंदी भाषा सीखने के लिए उन्होंने कई तरह की हिंदी डिक्शनरी खरीदी। जिन्हें पढ़कर हिंदी सीखी। वहीं, अमेरिका निवासी फ्रांसिको ने बताया कि उन्हें हिंदी बोलना नहीं आता है, लेकिन उन्हें हिंदी संगीत सुनना बहुत अच्छा लगता है।