नरेंद्रनगर ब्लॉक के नौडू गांव में शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची। चार सदस्यीय टीम ने गांव में जच्चा-बच्चा का हाल जाना। बच्चे का टीकाकरण कर मां की स्वास्थ्य जांच की। जांच में जच्चा-बच्चा स्वस्थ्य पाए गए।
गौरतलब है कि शासन-प्रशासन की लचर व्यवस्था के चलते सात नवंबर को नौडू गांव की एक महिला का आधे रास्ते जंगल में प्रसव हो गया था। गांव की महिलाएं गर्भवती को पल्ली में लिटाकर 12 किमी दूर सड़क मार्ग तक पहुंचा रही थीं। सड़क से करीब पांच किमी पहले लंबधार के पास जंगल में महिला ने बच्चे को जन्म दे दिया था। प्रसव के बाद गांव की महिलाएं और परिजन दोनों वापस घर आ गए थे। गांव में सड़क की सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया था। अमर उजाला ने आठ नवंबर के अंक में कब सुधरेंगे हालात, कोसों दूर खड़ी थी एंबुलेंस, जंगल में हो गया प्रसव शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद हरकत में आई स्वास्थ्य विभाग की टीम शनिवार को नौडू गांव पहुंची। टीम में सीएचओ हिमानी राणा, सौरभ, एएनएम सविता पैन्यूली, सोनी देवी शामिल रहीं। गांव के पूर्व उपप्रधान सुरेंद्र भंडारी ने बताया कि नौडू गांव में आशा नहीं है। गांव से करीब 25 किमी दूर तिमली गांव की आशा को नौडू गांव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दूरस्थ क्षेत्र होने से आशा भी समय-समय पर गांव में नहीं पहुंच पाती हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से नौडू गांव में एक आशा कार्यकर्ता की मांग की है। कहा कि नौडू गांव सड़क से करीब 12 किमी दूर है। सड़क सुविधा नहीं होने से गर्भवतियों और बर्जुुगों को परेशानी होती है। आशा कार्यकर्ता होने से गर्भवतियों की समय-समय पर स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण होगा। साथ ही उन्हें समय पर उपचार मिल जाएगा।
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कोट
जनसंख्या के हिसाब से आशा नियुक्त होती हैं। ग्राम स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं को बढ़ाने के लिए जिला और प्रशासन स्तर पर पत्राचार किया जा रहा है। उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया होगी ।
डाॅ. जगदीश जोशी, प्रभारी चिकित्साधिकारी फकोट ब्लॉक