ऋषिकेश। राज्य सरकार अंतरराष्ट्रीय तीर्थ एवं पर्यटन स्थल ऋषिकेश के मुनिकीरेती में गंगा पर निर्माणाधीन थ्रीलेन ब्रिज को उधार में बनवा रही है। आलम यह है कि योजना का कार्य लगभग 55 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है, मगर सरकार ने अब तक इसकी कुल लागत के महज 30 फीसदी का भी भुगतान किया है। करोड़ों का योजना का समयबद्ध धनावंटन नहीं होने से कई जरूरी कार्य अटके हैं। जिसका सीधा असर ब्रिज की डेड लाइन पर पड़ रहा है।
जनवरी 2013 में मुनिकीरेती में स्वीकृत थ्रीलेन ब्रिज के निर्माण में पहले लोक निर्माण विभाग नरेंद्रनगर डिवीजन ने अनावश्यक विलंब किया और अब राज्य सरकार योजना को पूर्ण कराने में रोड़ा बनी हुई है। सरकार करीब 36 करोड़ के इस ब्रिज के लिए तीन साल बाद भी महज 13 करोड़ का धनावंटन कर पाई है।
ब्रिज की साइट पर निर्माण एजेंसी लगभग 55 प्रतिशत कार्य पूर्ण करा चुकी है। इस लिहाज से कांट्रेक्टर का करीब आठ करोड़ का सरकार पर बकाया हो चुका है। जिसका भुगतान सरकार नहीं कर पा रही है। निर्माण एजेंसी इस बाबत पीडब्लूडी को भुगतान के लिए नोटिस भी जारी कर चुकी है। मगर विभाग से जवाब देते नहीं बन रहा।
सूत्रों की मानें तो महकमे को भी योजना के अगली किस्त के भुगतान के लिए शासन से गुहार लगानी पड़ रही है। मगर सुनवाई नहीं हो रही। ऐसे में पहले ही करीब सवा साल विलंब से बन रही योजना में करीब एक से डेढ़ साल तक का विलंब और हो सकता है।
सरकार के पास रस्से खरीदने के पैसे भी नहीं
ऋषिकेश। योजना की साइट पर एंकर ब्लॉक का कार्य 75 और वैल फाउंडेशन वर्क करीब 85 प्रतिशत पूरा हो चुका है। वैल फाउंडेशन का अवशेष कार्य में एक महीने का समय लग सकता है। इसके बाद विभाग इस पर टावर स्थापित करना शुरू करेगा। इसके बाद रस्सों से पुल का शक्ल दी जाएगी। पीडब्लूडी संबंधित कंपनी को अगस्त-2015 में लोहे के रस्से बनाने का ऑर्डर दे चुकी है, मगर कंपनी ने इसके लिए 25 फीसदी यानि करीब सवा करोड़ रुपये एडवांस डिमांड की है। सरकार द्वारा धन नहीं मिलने से उसे भुगतान नहीं हो पा रहा है। जिससे संबंधित कंपनी ने रस्से बनाने का कार्य शुरू नहीं किया है।
शासन से धनावंटन नहीं होने से विभाग कांट्रेक्टर को अवशेष भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। जिससे उसका काफी बकाया हो चुका है। वर्कशॉप में ब्रिज के टावर का कार्य पूरा करा लिया गया है। साइट पर जल्द इन्हें स्थापित किया जाएगा। इसके बाद रस्सों से पुल को बांधने का कार्य शुरू किया जाना है। संबंधित कंपनी को रस्से बनाने का ऑर्डर दिया जा चुका है। उसे एडवांस भुगतान किया जाना बाकी है।
- मोहम्मद आरिफ खान, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग नरेंद्रनगर डिवीजन।