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‘सोने का अंडा’ देती हैं ये मुर्गियां

Wed, 27 Jul 2016 02:05 AM IST
नवीन नौटियाल /अमर उजाला, ऋषिकेश
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मु‌गि पालन - फोटो : amar ujala
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डोईवाला ब्लाक में कुक्कुट (मुर्गी पालन) व्यवसाय सोने का अंडा देने वाली मुर्गी साबित हो रही है। खासकर ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी में इससे बड़ा बदलवा आया है। वे घरेलू कामकाज के साथ साथ छोटे स्तर पर इस व्यवसाय को अपनाकर बड़ा मुनाफा कमा रही हैं। इतना ही नहीं पशुपालन विभाग की ओर से इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए अनुसूचित जाति- जनजाति वर्ग के लिए विशेष सब्सिडी योजना शुरू की गई है। जिसके तहत वे विभाग की ओर से नि:शुल्क मिलने वाले 50 चूजों से इस व्यवसाय की शुरूआत कर सकते हैं। चूजों के लिए दाने और दवाइयों की व्यवस्था भी विभाग की ओर से की जाती है। डोईवाला ब्लाक में सामूहिक स्तर पर भी ग्रामीण महिलाएं इस व्यवसाय को अपना रही हैं।
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मध्यम वर्गीय कुक्कुट पालकों में बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना के तहत अधिक डिमांड आने पर कुक्कुट पालन विभाग की ओर से जिला योजना को यूनिट बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है। भेड़ एवं ऊन प्रसार संस्थान पशुलोक के निदेशक डा. एनके शर्मा ने बताया कि प्रदेश में हर साल कुक्कुट पालन व्यवसाय बढ़ रहा है। कुक्कुट पालन व्यवसाय कम लागत और कम समय में अच्छी कमाई का जरिया है। उन्होंने बताया कि इस तेजी से ब्लाक में प्रत्येक वर्ष कुक्कुट पालकों की संख्या में बढ़ रही है। इसका मतलब है कि मुर्गी पालन व्यवसाय में लोगों को अच्छा मुनाफा मिल रहा है। वहीं, उत्तराखंड राज्य पंचवर्षीय पशुधन संगणना के आंकड़ों के मुताबिक अन्य व्यवसायों के मुकाबले कुक्कुट पालन व्यवसाय तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2007 के मुकाबले वर्ष 2012 में कुक्कुटों की संख्या में 78.41 प्रतिशत की वृद्घि दर्ज की गई। डा. शर्मा ने बताया कि इस साल भी प्रदेश भर से पिछले साल की तुलना में चूजों की मांग अधिक आ रही है।

ऐसे लें योजना का लाभ
पशुधन प्रसार अधिकारी, कुक्कुट डोईवाला ब्लाक कृष्णा मुसान ने बताया कि ब्लाक में कुक्कुट में लोगों को रूझान बढ़ा है। खासकर महिलाएं इस काम में आगे आई हैं। उन्होंने बताया कि एससी और एसटी वर्ग के लोगों को सरकार की ओर से मुर्गी पालन के लिए मुफ्त चूजे दिए जाते हैं। योजना का लाभ लेने के लिए संबंधित व्यक्ति को ग्रामप्रधान से एक सादे कागज पर प्रस्ताव लिखवाकर ला सकता है। इसके बाद नियमानुसार आवेदनकर्ता को 50 चूजे, एक जाली, दस किलो दाना और जरूरी दवाई विभाग की ओर से दी जाती है। बताया कि बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना के तहत वर्ष 2014-15 में तीन हजार 250 और वर्ष 2015-16 में अब तक तीन हजार चूजे पात्र व्यक्तियों को वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा पिछले दो सालों में तीस लोगों को कुक्कुट पालन व्यवसाय की ट्रेनिंग दी गई।
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कम लागत और ज्यादा मुनाफा
ऋषिकेश रोड स्थित कुक्कुट प्रोडक्शन फार्म में तैनात पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मनोज कुमार तिवारी बताते हैं कि कुक्कुट पालन व्यवसाय ही एक ऐसा काम है, जिसमें कम समय, कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सही तरीके से कुक्कुट पालन व्यवसाय सोने का अंडा साबित हो
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