फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शास्त्रीय संगीत भगवान को जानने का माध्यम

Wed, 30 Mar 2016 12:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकेश
विज्ञापन
जार्ज - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
विश्वविख्यात संगीतज्ञ अमजद अली खान की शास्त्रीय संगीत प्रस्तुति अमेरिकी मूल की आनंद्रा के दिल में इतनी गहराई से उतरी कि उन्होंने पश्चिमी संगीत छोड़  शास्त्रीयता को आत्मसात कर लिया। भारतीय शास्त्रीय संगीत सीखने का संकल्प पूरा करने में उन्हें डेढ़ दशक लग गए। आनंद्रा बीते दो साल से दुनिया भर में लोगों को शास्त्रीय संगीत की तालीम देकर इसके प्रचार-प्रसार में जुटी हैं।
विज्ञापन


अमेरिकी मूल की शास्त्रीय संगीतज्ञ आनंद्रा जॉर्ज ने ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति अपने रुझान, इसकी तालीम लेने और इस ज्ञान को दुनिया के लोगों तक पहुंचाने के सफर पर विस्तृत चर्चा की। उनका मानना है कि शास्त्रीय संगीत भगवत कृपा है और इसके जरिये उन्हें करीब से जाना जा सकता है।

आनंद्रा ने पश्चिमी संगीत को मनोरंजन और शास्त्रीय संगीत को अंत:करण का विषय बताया। उनका मानना है कि इंडियन क्लासिकल म्यूजिक से विचारों में सकारात्मकता और जीवन में रचनात्मकता आती है।
विज्ञापन


आनंद्रा ने कहा कि 20 साल पहले वह पहली बार भारत आई थीं। उस दौरान क्लासिकल म्यूजिक से मेरा वास्ता पड़ा। मुझे साईं बाबा आश्रम पूटापट्टी में पहली बार प्रसिद्ध सरोद वादक अमजद अली खान साहब को सुनने का मौका मिला। इस प्रस्तुति से भारतीय शास्त्रीय संगीत मेरे दिल की गहराइयों में उतर गया। इसके बाद मैंने इंडियन क्लासिकल म्यूजिक सीखने का प्रण लिया।

संस्कृत सीखने में रुचि और मंत्र साधना के बाद मेरी शास्त्रीय संगीत की ओर रुचि और बढ़ गई। इसके बाद मैंने दिल्ली के संगीतज्ञ पंडित बलदेव राज वर्मा से विधिवत शास्त्रीय संगीत की तालीम ली। 2014 से आनंद्रा ने अपने स्टूडेंट्स को शास्त्रीय संगीत सिखाना भी शुरू कर दिया है। वह अब तक जापान, यूएसए, दुबई आदि देशों में शात्रीय संगीत के जरिये नाद योगा, भक्ति योगा और मंत्र साधना की कक्षाएं संचालित कर चुकी हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें