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Rishikesh News: हर-हर गंगे से गूंजे ऋषिकेश के घाट

Tue, 16 Jun 2026 02:13 AM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
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सोमवती अमावस्या पर परमार्थ निकेतन के गंगा घाट पर गंगा पूजन करते स्वामी चिदानंद सरस्वती व अन्य। 
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अधिकमास की पावन सोमवती अमावस्या पर ऋषिकेश में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। ब्रह्म मुहूर्त से ही गंगा तट हर-हर गंगे के उद्घोष से गूंज उठे। श्रद्धालुओं का स्नान का सिलसिला देर शाम तक चला और पूरे दिन गंगा घाटों पर पैर रखने की जगह नहीं बची।
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सोमवार को तड़के 3 बजे से ही श्रद्धालु हरिद्वार, देहरादून, दिल्ली, यूपी, पंजाब, हरियाणा और देश विदेश से पहुंचकर गंगा में डुबकी लगाने लगे। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान, दान और पितृ तर्पण करने से अक्षय पुण्य मिलता है और पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालुओं ने शीतल जल में स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य दिया, गंगाजल भरकर पितरों का तर्पण किया और मां गंगा से परिवार-समाज की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।
त्रिवेणीघाट, नावघाट, रामेश्वर घाट, साईंघाट, मुनि की रेती स्थित स्वामी नारायण घाट, पूर्णानंद घाट, शत्रुघ्न घाट, तपोवन स्थित साईं घाट, सच्चाधाम आश्रम घाट, लक्ष्मणझूला स्थित संत सेवा घाट, किरमोला घाट, भागीरथी घाट, लक्ष्मीनारायण घाट, गीताभवन घाट, साधु समाज घाट, परमार्थ निकेतन घाट, वानप्रस्थ घाट, वेद निकेतन घाट समेत सभी प्रमुख घाट श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रहे।
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भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने चप्पे-चप्पे पर तैनाती की थी। जल पुलिस की बोटें गंगा में गश्त करती रहीं। एसडीआरएफ और पीएसी के जवान घाटों पर मुस्तैद रहे। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने घाटों के किनारे बैठे साधु-संतों और जरूरतमंदों को दिल खोलकर दान किया।
अन्न, वस्त्र, कंबल, जूते-चप्पल, दक्षिणा और भोजन के भंडारे पूरे दिन चलते रहे। कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं ने घाटों पर प्रसाद, फल और जलपान की व्यवस्था की। पंडितों के सान्निध्य में पितृ तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए घाटों पर विशेष पंडाल लगे थे। स्थानीय दुकानदारों, पूजा सामग्री विक्रेताओं और नाव संचालकों के लिए भी यह दिन रोजी-रोटी का बड़ा अवसर बना।

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गंगा स्नान कर राष्ट्र समृद्धि और विश्व शांति की प्रार्थना की

अधिकमास की पावन सोमवती अमावस्या पर परमार्थ निकेतन में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने स्वामी चिदानंद सरस्वती, केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी, डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती और संत मुरलीधर के सान्निध्य में गंगा स्नान कर राष्ट्र समृद्धि और विश्व शांति की प्रार्थना की। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि 301 साल बाद बना यह दुर्लभ संयोग है। विश्व वृद्ध दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस का जिक्र करते हुए उन्होंने वृद्धों को परिवार की जड़ें और अनुभव का विश्वविद्यालय बताकर सम्मान और सेवा का संदेश दिया। उन्होंने पितृ तर्पण-पेड़ अर्पण की नई परंपरा शुरू करने का आह्वान किया। अस्थियों का एक भाग नदी में और शेष से माता-पिता की उम्र के बराबर फलदार पौधे लगाकर वृद्धजन स्मृति स्थल बनाएं, जिससे नदियों के तट पर ग्रीन कॉरिडोर बने। संत मुरलीधर ने श्रीराम परिवार के विपत्ति बांटने के संस्कार को आज के समाज के लिए आदर्श बताया। श्रद्धालुओं ने ध्यान, दान और यज्ञ में भाग लेकर संस्कार, सम्मान और सेवा का संकल्प लिया।
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