ऋषिकेश। बचपन में बार्बी डॉल किसी भी बच्चे का सपना होता है। लेकिन अब आप बॉर्बी डॉल की जगह अपने बच्चे को पहाड़ी डॉल (जुन्याली) भेंट कर सकते हैं। इसके दो फायदें हैं। एक तो बच्चे को डॉल मिल जाएगी और दूसरा यह डॉल आपके बच्चे को पहाड़ के रंग-रूप, संस्कृति, वेषभूषा और बोली से रूबरू कराएगी। जी हां, कुछ ऐसी ही है अपनी पहाड़ी डॉल जुन्याली। जिसे स्टार्टअप के तहत लॉच किया है तीन दोस्तों दीप नेगी, पंकज अधिकारी और अक्की अधिकारी ने। अपनी लॉचिंग के बाद धीरे-धीरे जुन्याली घर-घर अपनी जगह बना रही है। पहाड़ के रंगों और वेषभूषा में लिपटी इस गुड़िया को आप बच्चों को ही गिफ्ट करने के अलावा अपने ड्राइंगरूम और दफ्तर में भी सजा सकते हैं।
टिहरी गढ़वाल के जुवा पट्टी के सुनार गांव के दीप नेगी वर्तमान में दुबई में हेल्थकेयर कंपनी में लर्निंग स्पेशलिस्ट के पद पर कार्यरत है। जबकि इसी पट्टी के अलेरू गांव के पंकज व अक्की अधिकारी वर्तमान में गुड़गांव में प्राइवेट कंपनी में अच्छे पदों में कार्यरत हैं। तीनों दोस्तों ने स्टार्टअप के तहत कुछ अलग करने की सोची तो जुन्याली गुड़िया का जन्म हुआ। यूं तो जुन्याली की हार्ड बॉडी विदेशों से आयात होती है, लेकिन यहां दिल्ली और टिहरी में जुन्याली की पारंपरिक पोशाक घाघरा, गुलाबंद , पिछोड़ा, टाल्खा, कोटि, पहाड़ी टोपी, घिल्डा, टोकरी आदि तैयार की जाती है। यहीं उसे उसका पहाड़ी रंग-रूप और आकार दिया जाता है। जुन्याली को आप पहाड़की पहली म्यूजिकल डॉल भी कह सकते हैं। इस काम को अंजाम देने वाले तीनों युवाओं का कहना है कि यह केवल एक खिलौना मात्र नहीं है, बल्कि कई अभिभावकों का सपना है कि वो अपने बच्चों से हमारी समृद्ध सांस्कृतिक भाषा को बोलते हुए सुनें या कम से कम उन्हें इसकी जानकारी हो। इसीलिए हमने अपने बच्चों के लिए इस संगीतमय गुड़िया का सपना देखा, ताकि उनकी छोटी उम्र सेही वो हमारी संस्कृति और भाषा के प्रति रुचि लें और वो इसकी ओर आकर्षित भी हों। अच्छी बात यह है की जुन्याली को छोटे बच्चों के अलावा बड़े लोगों का भी प्यार मिल रहा है। वे इसे बच्चों को गिफ्ट करने के आलवा अपने दफ्तर में सजा रहे हैं। घरों में ड्राइंग रूम बैठा रहे हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी जुन्याली को बहुत पसंद किया और इस स्टार्टअप की सराहना की।
क्या कहते हैं जुन्याली के जन्मदाता
हमने जुन्याली को बाजार में उतारने से पहले ऽफ्योंली एन्ड पाइन्सऽ कंपनी की स्थापना की। रिवर्स माइग्रेशन को ध्यान में रखते हुए जुन्याली के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से यहां के लोगों का इससे जोड़ना चाहते थे। आज जुन्याली का सिर्फ शरीर बाहर से आयात होता है, जबकि उसके कपड़े से लेकर धागा तक उत्तराखंड में ही विशेषकर समूह से जुड़ी महिलाएं तैयार कर रही हैं। इस तरह मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा हम उन लोगों में बांट देते हैं, जो इस काम को अंजाम दे रहे हैं। कोई जुन्याली की पोशाक तैयार कर रहा है तो कोई उसका घाघरा, गुलाबंद, पिछोड़ा, टाल्खा, कोटि, पहाड़ी टोपी, घिल्डा , टोकरी आदि। इस तरह एक गुड़िया कई लोगों को रोजगार दे रही है। हमें उम्मीद है, जुन्याली बॉर्बी डॉल की तरह ही जल्दी पूरे विश्व में अपनी पहचान बनाएगी।
- दीप नेगी, मार्केटिंग हेड, फ्योंली एन्ड पाइन्स कंपनी
जुन्याली गुड़िया की विशेषताएं
- लचीली गुणवत्ता के कारण,गुड़िया की मुद्रा (सिर, हाथ) को बदला जा सकता है।
- इसमें सात प्रसिद्ध पहाड़ी गीतों (गढ़वाली, कुमाऊंनी) की श्रृंखला है, जो 60-सेकेंड बजती है।
- गुड़िया पहाड़ी गीतों पर नृत्य भीकरती है ।
- नृत्य ऑप्शन को अगर लॉक लिया जायतो गुड़िया सिर्फ पहाड़ी गीत गाती है।7
- इसमें रंगीन-चमकदार पंख हैं, जो की अंधेरे में चमकते हैं ।
- इसकी आंखें थ्रीडी हैं, जो की वास्तविक लगती हैं।
पहाड़ी गुड़िया जुन्याली- फोटो : RISHIKESH
पहाड़ी वेषभूषा में सजी सुंदर गुड़िया जुन्याली- फोटो : RISHIKESH
स्टार्टअप के तहत तैयार पहाड़ी वेषभूषा में सजी सुंदर गुड़िया जुन्याली।- फोटो : RISHIKESH