लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के चलते धन आवंटन नहीं हो पा रहा है। इस कारण बाढ़ सुरक्षा के काम नहीं हो पा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि विभागीय स्तर पर प्रयास हो रहे हैं कि किसी तरह बाढ़ सुरक्षा के काम कराए जा सकें।
जून में मानसून आ जाने पर इस बार खासी एहतियात रखनी होगी। मानसून में क्षेत्र की नदियां और नाले विकट रूप में आ जाते हैं। ऐसे में सिंचाई विभाग की ओर से बाढ़ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम पहले से ही किए जाते रहे हैं। प्रदेश में लोकसभा की चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण छोटे-बड़े कार्य इस बार धन आवंटन नहीं होने से लटके हैं। छोटे कामों में नदियों को चेनलाइज किया जाता है। माजरी ग्रांट शेरगढ़ में नदी के तेज बहाव से हुए कटाव से एक मकान बह गया था। विभाग की ओर से सौंग, जाखन और सुसवा नदी को चेनलाइज करने के प्रस्ताव दिए गए हैं। साथ ही सुसवा नदी में रिवर ड्रेजिंग का भी प्रस्ताव दिया गया है। इसके अलावा सिपेट सौंग नदी और बीएसएफ सुसवा नदी पर बाढ़ सुरक्षा दीवार बनाने की योजना थी। तमाम कामों के लिए अब तक धनराशि मुहैया नहीं हो सकी।
विभाग की ओर से बाढ़ सुरक्षा के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजे गए थे। इनके लिए धन आवंटन नहीं होने से काम शुरू नहीं हो सके हैं। विभागीय स्तर पर कुछ कामों को कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। - डीसी उनियाल, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग।