सदर विधायक ने विधानसभा में उठाया था डग्गामार वाहनों का मामला
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यात्री वाहनों की कंप्यूटरीकृत जांच के लिए राज्य की पहली प्रस्तावित आटोमैटिक टेस्टिंग लेन योजना आठ साल बाद भी परवान नहीं चढ़ सकी है। लिहाजा इस साल भी यात्रा में संचालित वाहनों की फिटनेस मैनुअल ही होगी।
हरिद्वार बाईपास मार्ग पर सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय के समीप वर्ष 2007 में आटोमैटिक टेस्टिंग लेने के लिए भूमि चिह्नित की गई और प्राकलन भी तैयार किया गया। दो साल में ये टेस्टिंग लेन बनकर तैयार होना था, लेकिन प्रस्तावित योजना फाइलों में कैद होकर रह गई।
आटोमैटिक टेस्टिंग लेन में चारधाम यात्रा में संचालित वाहनों समेत सभी व्यावसायिक वाहनों की कंप्यूटरीकृत फिटनेस होनी थी। वर्तमान में इनकी फिटनेस मैनुअल होती है। मैनुअल फिटनेस में वाहनों के वायपर, टायरों का अलायमेंट, बॉडी की जांच ही हो पाती है। जबकि आटोमैटिक टेस्टिंग लेन में वाहनों के ब्रेक, इंजन की आंतरिक स्थिति आदि की जांच भी होनी थी। इससे पर्वतीय रूट पर संभावित हादसों को रोका जा सके। लेकिन, योजना फाइलों में कैद होकर रह गई।
आटोमैटिक टेस्टिंग लेन के निर्माण के लिए परिवहन विभाग ने प्रक्रिया शुरू की, लेकिन चिह्नित वनभूमि परिवहन विभाग को हस्तांतरित नहीं होने से योजना अधर में लटक गई। भूमि मिलने पर ही योजना धरातल पर उतरेगी।-डॉ. अनिता चमोला, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी
परिवहन विभाग ने 1.2 हेक्टेयर भूमि के लिए आवेदन किया था। वनभूमि हस्तांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन नहीं होने से विलंब हुआ। संबंधित विभाग ने ऑनलाइन आवेदन कर दिया है। विभागीय प्रक्रिया चल रही है। वनभूमि परिवहन विभाग को जल्द हस्तांतरित होने की उम्मीद है।-गंगासागर नौटियाल, वनक्षेत्राधिकारी