- आपदा प्रबंधन मंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया निरीक्षण
- क्षतिग्रस्त पुलिया के पुनर्निर्माण के लिए डीपीआर तैयार करने के दिए निर्देश
श्यामपुर/ऋषिकेश। आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने गौहरी माफी और रायवाला में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को गौहरी माफी में सौंग नदी से होने वाले कटाव के स्थायी समाधान के दिए निर्देश दिए। साथ ही गौहरी माफी और रायवाला को जोड़ने वाली क्षतिग्रस्त पुलिया के पुनर्निर्माण के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए।
16, 17 अगस्त को हुई भारी बारिश के कारण सौंग और सुसवा नदी उफान पर है। सौंग नदी के उफान पर आने से गौहरी माफी और रायवाला में कई स्थानों पर बाढ़ जैसे हालत हैं। जलभराव के कारण प्रभावित क्षेत्रों का आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक की ओर से स्थलीय निरीक्षण किया गया। इस दौरान उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में भू-कटाव, जलभराव और क्षतिग्रस्त पुलिया की स्थिति का जायजा लेते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों से अब तक की गई कार्रवाई और कार्ययोजना की जानकारी ली। गौहरी माफी क्षेत्र में सौंग नदी के कारण हो रहे भू-कटाव व नदी का पानी आवासीय क्षेत्रों में प्रवेश करने की समस्या का निरीक्षण किया गया। इस दौरान अधिकारियों से क्षेत्र में अब तक किए गए सुरक्षात्मक कार्यों की जानकारी ली गई। मंत्री ने प्रभावित क्षेत्र में जल्द ही सुरक्षात्मक उपाय करने के साथ ही समस्या के स्थायी समाधान के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान स्थानीय विधायक प्रेमचंद अग्रवाल, तहसील प्रशासन, जिला आपदा प्रबंधन, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग सहित कई विभागों के अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
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क्षतिग्रस्त पुलिया के पुनर्निर्माण के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश
रायवाला खेल मैदान के समीप गौहरी माफी और रायवाला को जोड़ने वाली क्षतिग्रस्त पुलिया का भी निरीक्षण किया गया। यह पुलिया सुसुवा नदी के कारण क्षतिग्रस्त हुई है। मंत्री ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को पुलिया के पुनर्निर्माण/मरम्मत के लिए तत्काल डीपीआर तैयार कर जिलाधिकारी कार्यालय या फिर जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय को आवश्यक धनराशि की स्वीकृति के लिए प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। वहीं आडवाणी प्लॉट में जलभराव के स्थायी समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को मानसून अवधि में लगातार पंपिंग के माध्यम से जल निकासी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
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