खांडगांव में रोपाई नही होने के चलते धान के पौध लगी लगी खराब हो गई।
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रायवाला। हाईवे निर्माण के दौरान पांच माह पूर्व अनावश्यक खुदान के चलते टुटी सिंचाई नहर समय रहते नहीं बनने से सिंचाई आपूर्ति के बिना गांव की करीब आठ सौ बीघा खेती बंजर रह गई। मूल रूप से खेती पर निर्भर ग्रामीणों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया। अब ग्रामीण बंजर खेतों के चलते हुए आर्थिक नुकसान के मुआवजें की मांग को आंदोलन करेंगे।
टिहरी से 41साल पहले विस्थापित होकर खांडगांव में बसाए गए तीन सौ परिवारों को अपनी करीब 800 बीघा कृषि भूमि को इस फसली वर्ष में टुटी नहर से सिंचाई आपूर्ति नहीं होने के चलते खेत खाली छोड़ने को मजबूर होना पड़ा। उपजाऊ खेती होने के बाद भी बेबस किसान बंजर पड़े खेतों को लेकर चिंतित है। पीड़ित किसान बीर सिंह, रविंद्र सिंह नेगी, वाचस्पति डंगवाल, गोविद सिंह, आदि ने बताया कि अपने जीवन काल में खेतों के बंजर होने की पहली घटना को लेकर आर्थिक और मानसिक संकट झेल रहे हैं। इससे उभारने के लिये प्रशासन को जल्द संज्ञान लेकर उचित कदम उठाने चाहिए थे। किंतु प्रशासन किसानों के प्रति मौन बना हुआ है। ग्राम प्रधान शंकर दयाल धनै ने बताया कि किसानों को मुआवजें हेतु पत्र के माध्यम से गुहार लगाई गई थी, जिसका कोई जवाब आज तक नहीं मिला है। मजबूरन किसानों के लिए फिर से ग्राम पंचायत को जनआंदोलन के लिए उतरना पड़ेगा।
प्रशासन के आश्वासन पर एक बार स्थागित हो चुका है आंदोलन
पीड़ित किसानों की ओर से टुटी हुई सिंचाई नहर को दुरुस्त कर आपुर्ति सुचारू किए जाने को लेकर जनआंदोलन को ऐलान किया था। किंतु प्रशासन की ओर से अस्थाई व्यवस्था कर जल्द सिंचाई आपुर्ति को सुचारू करने का आश्वासन देकर आंदोलन स्थगित करा दिया। आंदोलन स्थगित के आश्वासन की समय सीमा के बीच खेतों में धान रोपाई की भी समय सीमा समाप्त हो गई। किसानों का कहना है कि है अब आंदोलन सिंचाई आपूर्ति को छोड़ बंजर पड़े खेतों से हुए आर्थिक और मानसिक नुकसान के मुआवजे के लिए किया जाएगा।
धान की पौध हुई खराब
किसानों को प्रशासन की ओर से सिंचाई आपुर्ति जल्द सुचारू किए जाने का लगातार मिल रहे आश्वासन के चलते कीमती प्रजाति की धान बीज से पौध बोई गई। खेतों को रोपाई के लिये तैयार किया जाने लगा किंतु अस्थायी व्यवस्था बरसात के भेंट चढ़ने के बाद प्रशासन चुप बैठ गया। और इधर खेतों में की गई किसानों की मेहनत और धान की पौध रौपाई नहीं लगने के कारण बड़ी होकर पुरी तरह से बेकार हो गई।