डोईवाला। राज्य सरकार ने इस पेराई सत्र के लिए गन्ना मूल्य पिछले वर्ष का ही रखा है। इससे गन्ना किसानों में खासा आक्रोश है। सरकार ने राज्य परामर्शी मूल्य घोषित करते हुए सामान्य प्रजाति के लिए 317 और अगेती प्रजाति के लिए 327 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है। यही गन्ना मूल्य पिछले वर्ष भी था। गन्ना किसानों को राज्य सरकार से गन्ना मूल्य बढ़ाकर देने की उम्मीद थी, लेकिन इस पेराई सत्र के लिए गन्ना मूल्य पुरानी दरों पर ही रखने से किसानों में नाराजगी है।
डोईवाला परिक्षेत्र में ही करीब दस हजार गन्ना किसान हैं। डोईवाला के किसानों की पहली पसंद भी गन्ना की फसल होती है। गन्ना मूल्य पुरानी दरों पर ही रखने पर गन्ना किसानों में काफी मायूसी है। अमर उजाला ने गन्ना मूल्य को लेकर किसानों की राय जानी। पेश है रिपोर्ट...
दो साल से गन्ना मूल्य सरकार की ओर से नहीं बढ़ाया गया है। इससे स्पष्ट है कि सरकार गन्ना किसानों के हालात सुधारने की पक्षधर नहीं है। केंद्र और राज्य सरकारें किसानों की आय को दोगुनी करने का दंभ भर रही है, लेकिन हकीकत यह है कि किसानों को वाजिब मूल्य नहीं भी नहीं दिया जा रहा है।
-उम्मेद वोरा, सिमलास ग्रांट
गन्ना उत्पादन में किसान की अधिक लागत आ रही है। उसके सापेक्ष गन्ना मूल्य नहीं मिल पा रहा है। गन्ना किसान इससे हतोत्साहित हो रहा है। सरकार ने गन्ना किसानों की भावनाओं की अनदेखी कर पुराना गन्ना मूल्य घोषित किया है।
-अब्दुल अजीज, बुल्लावाला
खाद, सिंचाई, उपकरण और श्रमिक प्रतिवर्ष महंगे होते जा रहे हैं। राज्य सरकार ने गन्ना मूल्य पुरानी दरों पर ही देने की घोषणा की है। गन्ना किसानों ने सरकार से 425 प्रति क्विंटल देने की मांग की थी। सरकार ने गन्ना मूल्य तय करते समय किसानों के प्रति उदासीनता का भाव दिखाया है।
-रणजोध सिंह, झबरावाला
एक तो सरकार ने गन्ना किसानों का पुराने पेराई सत्र का बकाया भुगतान नहीं किया और ऊपर से गन्ना मूल्य भी नहीं बढ़ाया है। सरकार का यह फैसला अव्यावहारिक है। सरकार को गन्ना परामर्शी समिति की गन्ना मूल्य निर्धारण के बनाई गई रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए। किस आधार पर गन्ना मूल्य पुरानी दरों पर ही रखा गया है।
-गुलशन अरोड़ा, डोईवाला