मृत्यु के बाद भी दुनिया को देखने और दूसरों का जीवन संवारने का संकल्प लेकर पांच पुण्यात्माओं ने समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की है। जसवंत, शशि, फूलारानी, संजय और आशा की आंखों से अब कई अंधेरे जीवन रोशन होंगे।
नेत्रदान के इस पुनीत कार्य से जुड़े लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि के चार्टर अध्यक्ष गोपाल नारंग ने बताया कि बीते पखवाड़े में अनेक परिवारों ने नेत्रदान कर मानवता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।
सुभाषनगर बनखंडी निवासी जसवंत सिंह रतन के निधन पर हिम्मत सिंह की सूचना पर परिजनों ने नेत्रदान कराया। उधर प्रेमनगर निवासी फूला रानी खन्ना और संजय कुमार के निधन पर अमित भाटिया की सूचना पर परिजनों ने नेत्रदान कराया।
ऋषिकेश निवासी शशि आनंद के निधन पर हिमालयन हॉस्पिटल की नेत्रदान रेस्क्यू टीम के डॉ. रोहित मेहंदीरत्ता की ओर से मृतक के पार्थिव शरीर से सफलतापूर्वक कॉर्निया सुरक्षित प्राप्त किए गए। आशा सरन के निधन पर राकेश नागपाल के प्रेरित करने पर परिजनों ने नेत्रदान कराया। निर्मल आई हॉस्पिटल की टीम के डॉ. रंग एवं डॉ. मकरेंदु ने मृतक के पार्थिव शरीर से कॉर्निया सुरक्षित किए।
लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि के जनसंपर्क अधिकारी मनमोहन भोला ने बताया कि यह मिशन का 439वां सफल प्रयास है, जो निरंतर और अविरल रूप से चलता रहेगा, ताकि किसी की मृत्यु किसी और के जीवन में नई रोशनी बन सके।
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अपनी धर्मपत्नी शशि आनंद के जाने का अपार दुख है, लेकिन इस बात का सुकून भी है कि उनकी आंखों से किसी जरूरतमंद को नई रोशनी मिलेगी। - हरीश आनंद, पूर्व पार्षद