विश्वविख्यात महर्षि महेश योगी की भावतीत चौरासी कुटिया पर्यटकों के लिए जल्द खुल सकती है। शासन स्तर से इसे अगर हरी झंडी मिली तो उम्मीद है कि 15 अक्तूबर से यह पर्यटकों के लिए खुल जाएगी। आध्यात्म का सबसे बड़ा केंद्र मानी जाने वाली चौरासी कुटिया कोरोना काल के कारण बीते छह महीने से बंद है। इससे पर्यटकों को इसके मुख्यद्वार से मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क अंतर्गत स्वर्गाश्रम क्षेत्र में योगगुरु महर्षि महेश योगी ने योग, ध्यान के लिए वर्ष 1957 में यहां आश्रम का निर्माण किया था। वन विभाग से लीज पर भूमि लेने के बाद योगगुरु ने यहां भावतीत और योगध्यान के लिए योग नगरी का निर्माण किया। वर्ष 1984 में योगगुरु यह आश्रम छोड़कर नीदरलैंड चले गए। पार्क प्रशासन ने फिर इस पर अपना स्वामित्व जमा दिया। करीब दो दशक तक यह क्षेत्र पर्यटकों के लिए प्रतिबंधित रहा। पर्यटकों और स्थानीय लोगों की आवाजाही नहीं होने से यह आश्रम धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होने लगा। वर्ष 2016 में शासन स्तर पर पहल के बाद पार्क प्रशासन ने इसे पर्यटकों के लिए खोल दिया।
चौरासी कुटिया में प्रवेश के लिए पार्क प्रशासन ने पर्यटकों के लिए शुल्क निर्धारित किया है। यहां विदेशी पर्यटकों के लिए 600 और देशी पर्यटकों के लिए 300 रुपये शुल्क है। वहीं, छात्र-छात्राओं के लिए 200 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
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बीटल्स ग्रुप से विख्यात हुई चौरासी कुटिया
वर्ष 1968 में चौरासी कुटिया में इग्लैंड का मशहूर ग्रुप बीटल्स के चार सदस्य जॉर्ज हैरिस, पॉल मर्काटनी, रिगो स्टार, जॉन आए थे। ये लोग यहां करीब चार महीने रुके। इसके बाद इन्होंने यहां करीब 39 गानों की धुन तैयार की। जिन्हें विदेशी आज भी बढ़े आनंद से सुनते हैं। वीटल्स ग्रुप के कारण इस आश्रम में विदेशी पर्यटकों की चहलकदमी ज्यादा होती है।
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कुटिया में है आकर्षण का केंद्र
चौरासी कुटिया में बनी करीब 110 गुंबदनुमा कुटिया के साथ ही छोटी-छोटी 84 कुटिया का ढांचा आर्कषण का केंद्र है। यहां आश्रम की कलाकृतियां देशी, विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।
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चौरासी कुटिया को खोलने के लिए शासनस्तर पर पत्राचार किया जा रहा है। उम्मीद है कि 15 अक्तूबर से यह पर्यटकों के लिए खुल जाएगी।
- बृजमोहन शर्मा, गौहरी रेंज अधिकारी