योग के लिए प्रसिद्ध ऋषिकेश में आर्थिक रूप से कमजोर छात्र योग की शिक्षा नहीं ले पा रहे हैं।
श्रीदेव सुमन विवि के पीएलएमएस परिसर में योग विभाग स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रम के तहत संचालित हो रहा है। जिससे छात्रों को एमए योगा पाठ्यक्रम के लिए 50 हजार से अधिक शुल्क देना पड़ रहा है।
वर्ष 2003 में गढ़वाल विवि ने पीएलएमएस परिसर में पीजी डिप्लोमा की मान्यता दी थी। तब यह ऑटोनोमस महाविद्यालय था और गढ़वाल विवि से सम्बद्ध था। वर्ष 2008 में विवि ने एमए योग पाठ्यक्रम की मान्यता दी थी। तब उक्त दोनों पाठ्यक्रमों को स्ववित्त पोषित रखा गया था।
वर्ष 2019 में महाविद्यालय को श्रीदेव सुमन विवि का परिसर बनाया गया। लेकिन श्रीदेव सुमन विवि ने भी योग पाठ्यक्रम को सामान्य पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया। स्ववित्त पाठ्यक्रम होने के कारण योग एमए के लिए छात्रों को दो वर्षों में 50 हजार से अधिक शुल्क देना पड़ता है। इसके अलावा बाहर से आने वाले छात्रों को किराये का कमरा आदि पर भी खर्चा करना पड़ता है। जिससे एमए योग पर खर्चा एक लाख से अधिक पहुंच जाता है।
अन्य शहरों से ऋषिकेश परिसर में योग पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाली छात्राओं को खासी दिक्कत होती है। क्योंकि छात्राओं के लिए परिसर में छात्रावास की सुविधा भी नहीं हैं। ऐसे में कई छात्र-छात्राएं चाहते हुए भी योग की पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। छात्र लंबे समय से योग पाठ्यक्रम को सामान्य पाठ्यक्रम घोषित किए जाने की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में यहां योग विभाग में 70 से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं।
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परिसर में ई-ऑफिस व्यवस्था शुरू
श्रीदेव सुमन विवि के पं. ललित मोहन शर्मा परिसर में अब विभागीय पत्रावलियों को विवि मुख्यालय भेजने या विवि मुख्यालय से परिसर में भेजने के लिए कर्मियों को चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। यहां अब ई-ऑफिस व्यवस्था शुरू कर दी गई है। परिसर निदेशक प्रो. एमएस रावत ने कहा कि ई-ऑफिस व्यवस्था के तहत पत्रावलियां वेबसाइट के माध्यम से भेजी जा रही है। इस व्यवस्था के तहत यह जानकारी भी रहती है कि भेजी गई पत्रावली किस पटल पर है या फिर पत्रावली की प्रक्रिया कहां तक गतिमान है।
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- योग को सामान्य पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की प्रक्रिया गतिमान है। जल्द इसे सामान्य पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया जाएगा। - प्रो. एमएस रावत, निदेशक, पीएलएमएस परिसर, ऋषिकेश