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एम्स में सांस लेने की थेरेप पर हुई चर्चा

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ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश एवं इंडियन एसोसिएशन ऑफ रेस्पिरेटरी केयर के संयुक्त तत्वावधान में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दो दिवसीय कार्यक्रम शुरू हुआ। कार्यक्रम के पहले दिन श्वांस रोग से जुड़े देश-दुनिया के विशेषज्ञों ने कोविड-19 के दौरान रेस्पिरेटरी केयर (श्वसन संबंधी देखभाल ) के आधारभूत सिद्धांतों पर चर्चा की। जिसमें देश-विदेश से करीब 1200 प्रतिभागी शामिल हुए।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एम्स निदेशक प्रोफेसर रविकांत व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के स्वास्थ्य प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय मानव संसाधन सलाहकार कविता नारायण शामिल हुए। एम्स निदेशक ने कहा कि हमारे देश में कई संस्थानों में इस तरह के पाठ्यक्रमों की शुरुआत होनी चाहिए, जिससे हमें भविष्य में इस तरह की महामारी से लड़ने में मदद मिल सकेगी। कहा रेस्पिरेटरी थेरेपी को अभी तक अधिक प्रोत्साहन नहीं मिल पाया है। इस थेरेपी को बढ़ावा देने के लिए एम्स ऋषिकेश, उत्तर भारत का पहला संस्थान है, जहां इस विधा में बीएससी कोर्स की शुरुआत की गई है। कोविड-19 के रोगियों में श्वास संबंधी विकार की स्थिति में यह विधा और भी उपयोगी हो जाती है।
एम्स दिल्ली के निश्चेतना विभाग के प्रोफेसर अंजन त्रिखा ने कहा कि इससे अन्य संस्थानों को भी इस पाठ्यक्रम को शुरू करने की प्रेरणा मिलेगी। मरीजों के जल्द स्वास्थ्य लाभ के लिए इस तरह के पाठ्यक्रम को बढ़ावा मिलना ही चाहिए।
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इस मौके पर संस्थान के स्वांस रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर गिरीश सिंधवानी, संस्थान के डीन अलाइड हेल्थ साइंसेज प्रोफेसर शैलेन्द्र कुमार हांडू, श्वास रोग विभाग के सहायक आचार्य डॉक्टर लोकेश सैनी, इंडियन एसोसिएशन ऑफ रेस्पिरेटरी केयर के जनरल सेक्रेटरी जितिन के. श्रीधरन, चेयरमैन डॉ. मंजूष कार्तिक आदि शामिल थे।
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