लोक संस्कृति विरासतीय शोभायात्रा समिति की नीलकंठ में आयोजित बैठक में क्षेत्र के मठ-मंदिरों, ग्राम और कुल देवताओं की डोलियों को अर्द्धकुंभ 2016 में शाही स्नान कराने पर विमर्श किया गया। बताया गया कि अर्द्धकुंभ मेले के अंतर्गत क्षेत्र की देव डोलियां 21 अप्रैल को ऋषिकेश पहुंचेंगी। हरिद्वार में 22 अप्रैल को उत्तराखंड की देव डोलियों को शाही स्नान कराया जाएगा।
मंगलवार को नीलकंठ मंदिर परिसर में आयोजित बैठक में पूर्व कैबिनेट मंत्री और समिति के अध्यक्ष मोहन सिंह रावत गांववासी ने कहा कि कुंभ पर्व पर पहाड़ की देव डोलियों को शाही स्नान में शामिल करने का मूल उद्देश्य लोक संस्कृति और विरासतीय आस्था के प्रतीकों का संरक्षण और संवर्धन करना है।
ताकी, आधुनिक विकास में सनातनी लोक जीवन का ज्ञान और विज्ञान सुरक्षित रह सके। उन्होंने बताया कि इससे पहाड़ के विरासतीय आस्था स्थलों को देश-दुनिया के श्रद्धालुओं, आस्थावानों में पहचान तो मिलेगी ही, साथ ही उक्त स्थलों पर तीर्थाटन बढ़ने से स्थानीय बेरोजगारों के लिए रोजगार के अवसर भी खुलेंगे।
इससे पलायन पर भी कुछ हद तक रोक लगेगी। इस दौरान नीलकंठ मंदिर, श्री भुवनेश्वरी मंदिर, चौंडेश्वरी देवी मंदिर, श्री यमकेश्वर महादेव मंदिर समेत विभिन्न गांवों के ग्राम और कुल देवताओं की डोलियों, विरासतीय प्रतीकों को कुंभ स्नान में शामिल करने के लिए लोगों को प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर नीलकंठ मंदिर के प्रबंधक महंत सुभाष पुरी, यमकेश्वर के पूर्व ब्लॉक प्रमुख प्रशांत बड़ोनी, गढ़ सलाण विकास समिति दिल्ली-यमकेश्वर के अध्यक्ष राजेश राणा, महासचिव वाचस्पति भट्ट सलाणी, डॉ. अवनीश नौटियाल, कुलवीर पंवार, संजय गंगोला, विजेंद्र चौहान, कमल भंडारी, धर्मेंद्र पंवार, राजवीर पंवार, एसएस पयाल आदि मौजूद थे।