भरत विहार में कोर्ट से स्टे के बावजूद किया जा रहा निर्माण कार्य।
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हाईकोर्ट ने आम बाग क्षेत्र में नये निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, इसके बावजूद एमडीडीए अफसरों ने बहुमंजिला इमारतों को छोड़ अन्य निर्माणों को हरी झंडी दे दी है। दलील यह है कि हाईकोर्ट ने बहुमंजिला इमारतों के निर्माण पर रोक लगाई है, छोटे निर्माण पर रोक का जिक्र नहीं है। जबकि कोर्ट के आदेशों में स्पष्ट जिक्र किया गया है कि आम बाग क्षेत्र में कोई भी नव निर्माण नहीं हो पाएगा। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत निर्माण तभी हो सकेंगे जब प्राधिकरण से पूर्व अनुमति ली गई हो।
बीते 31 अक्तूबर को आम बाग पर एमडीडीए ने बिना नक्शे के निर्माणाधीन दो बहुमंजिला इमारतों पर सील की कार्रवाई की थी। यह प्राधिकरण के कार्यभार ग्रहण करने के बाद पहली कार्रवाई थी। अब प्राधिकरण ने मात्र 50 मीटर की दूरी पर बन रहे अन्य छोटे भवनों पर सील की कार्रवाई तो दूर उसे नजर अंदाज कर दिया। इस मामले पर एमडीडीए के अधिशासी अभियंता श्याम मोहन शर्मा ने कहा कि हाईकोर्ट ने सिर्फ मल्टीस्टोरी भवनों के निर्माण पर रोक लगाई हुई है। इस कारण छोटे भवनों को इस कार्रवाई से दूर रखा गया है।
कोट्स
बृहस्पतिवार को एमडीडीए की ओर से ऋषिकेश के कुछ बहुमंजिला इमारतों पर सीलिंग की कार्रवाई होनी है। संभव हो सका तो आमबाग का भी निरीक्षण किया जाएगा।
- श्याम मोहन शर्मा, अधिशासी अभियंता, एमडीडीए
स्टे के बावजूद निर्माण कार्य जारी
ऋषिकेश। भरत विहार में कमिश्नर कोर्ट से स्टे के बावजूद भी निर्माण कार्य जोर शोर से चल रहा है। 31 अक्तूबर को एमडीडीए के अफसर भरत विहार स्थित बहुमंजिला भवन को सील करने पहुंचे थे। इससे पहले ही निर्माणकर्ता ने प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता श्याम मोहन शर्मा को कमिश्नर कोर्ट का स्टे ऑर्डर दिखा दिया था। हालत ये हुई कि अफसर भवन को सील किए बिना लौट गए। अब एक तरफ तो स्टे आर्डर है दूसरी तरफ निर्माण भी जारी है। एमडीडीए के अफसर इस पर चुप्पी साधे हैं।