शुगर मिल डोईवाला समेत कई चीनी मिलों का पेराई सत्र बिना गन्ना मूल्य निर्धारण और बकाया भुगतान किए बगैर सरकार ने शुरू कर दिया है। ऐसे में गन्ना उत्पादक किसान पशोपेश में हैं। किसानों ने मांग की है कि पहले पिछला बकाया भुगतान किया जाए बाद में नया गन्ना मूल्य घोषित किया जाए।
गन्ना की खेती भी महंगाई की चपेट में आई है। खाद, कीटनाशक दवा, सिंचाई, डीजल, उपकरण और श्रमिक तक महंगे हो गए हैं। ऊपर से बिना गन्ना मूल्य घोषित किए किसानों से गन्ना खरीद शुरू हो गई। क्षेत्रीय गन्ना किसानों ने सरकार के सामने गन्ने की खेती के सभी तथ्यों की पड़ताल कर 350 रुपये प्रति कुंतल गन्ना मूल्य करने की मांग की है।
सोमवार को किसानों ने अमर उजाला के साथ परिचर्चा में गन्ना मूल्य 350 प्रति कुंतल की दर से देने की मांग करते हुए कहा कि इतना मूल्य मिलने पर ही किसान खेती के प्रति उत्साहित हो सकता है। गन्ना की खेती के प्रति किसान अब हतोत्साहित हो रहा है। बिना गन्ना मूल्य घोषित किए पेराई सत्र शुरू करना औचित्यपूर्ण नहीं है।
मजबूरी में गन्ना किसान आपूर्ति कर रहा है। चूंकि उसे गेहूं की फसल भी लेनी है। ऐसे में आपूर्ति करने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। सरकार को चाहिए कि किसानों की समस्याओं को देखते हुए वर्तमान गन्ना मूल्य 350 प्रति कुंतल कर दिया जाए। - रणजोध सिंह, गन्ना किसान झबरावाला।
अब तक प्रदेश सरकार यूपी का गन्ना मूल्य देखकर उत्तराखंड के लिए गन्ना मूल्य तय करती है जो उचित नहीं है। दोनों राज्यों में विषमताएं हैं। कई सालों से गन्ना मूल्य बढ़ाकर नहीं दिया जा रहा है। जिससे किसान खेती से विमुख हो रहा है। प्रदेश में गन्ने की खेती को बढ़ाने के लिए सरकार को किसानों को गन्ना मूल्य 350 देना ही चाहिए। - गुलशन अरोड़ा, पूर्व अध्यक्ष गन्ना समिति डोईवाला।
सरकारों द्वारा गन्ना भुगतान की मजबूत व्यवस्था नहीं की गई है जिससे गन्ने की पैदावार घट रही है। गन्ना किसान की नकदी फसल मानी जाती है लेकिन पूरा गन्ना उधार में जा रहा है और भुगतान विलंब से हो रहा है। सरकार गन्ना किसानों की परेशानियों का अध्ययन करेगी तो निश्चित तौर प्रति कुंतल 350 देने के लिए तैयार हो जाएगी।
- कुंवर सिंह मनवाल, वरिष्ठ किसान जौलीग्रांट।