गुजरात में पटेल समुदाय को ओबीसी का दर्जा दिलाने को लेकर चर्चा में आए हार्दिक पटेल ने केंद्र सरकार पर नमामि गंगे के नाम पर करोड़ों की धनराशि बर्बाद करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हरिद्वार से लेकर ऋषिकेश के बीच कई स्थानों पर गंदे नाले सीधे गंगा में प्रवाहित हो रहे हैं।
केंद्र सरकार का इस ओर ध्यान नहीं है। नोटबंदी के फैसले को अव्यवहारिक बताते हुए कहा कि यह सिर्फ गरीब वर्ग को परेशान करने की योजना है। शीशमझाड़ी स्थित रामस्वरूप आश्रम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पटेल ने कहा कि गुजरात हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार उन्हें छह महीने गुजरात से बाहर रहना है।
उत्तराखंड आने का मौका मिला तो पहाड़ों की ओर चला आया। यहां आकर गंगा में गिरते गंदे नालों को देखकर लग रहा है कि केंद्र सरकार नमामि गंगे स्वच्छता अभियान में केवल पैसे बर्बाद कर रही है। केंद्रीय मंत्री उमा भारती गंगा स्वच्छता के नाम पर उत्तराखंड में अपनी टीम के साथ केवल फोटो खिंचवाने तक ही सीमित रहीं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने करोड़ों के विज्ञापन के माध्यम से गुजरात को विकसित बताया है। जबकि गुजरात में लोग बेरोजगारी, गरीबी से तंग हैं। मोदी सरकार के मंत्री अपने बच्चों की शादी में करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रहे हैं। मजदूर, गरीब लोग दो हजार रुपये के लिए दिनभर बैंक, एटीएम की लाइन में खड़े हैं।
हार्दिक पटेल ने बताया कि 17 जनवरी को हाईकोर्ट की गुजरात से बाहर रहने की तारीख समाप्त हो रही है। इसके बाद वे गुजरात में पटेल आंदोलन को और तेज करेंगे। इस मौके पर स्वामी कृष्णानंद, महामंडलेश्वर ईश्वर दास, रामस्वरूप ब्रह्मचारी, बलवीर सिंह, प्रकाशानंद, जयेंद्र पटेल, विपुल पटेल भी उपस्थित रहे।