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बच्चे नहीं जानते पहाड़ का गांधी कौन?

Thu, 03 Dec 2015 01:28 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ऋषिकेश
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जिस राज्य के निर्माण के लिए जनता को कड़ा संघर्ष करना पड़ा, लोगों को लाठी और गोली खानी पड़ी, कुछ लोगों को प्राणों की आहुति भी देनी पड़ी, उसी उत्तराखंड की भावी पीढ़ी ऐतिहासिक आंदोलन और उससे जुड़े अहम सवालों से नावाकिफ है।
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शहादत के बाद मिले उत्तराखंड की चुनी हुई सरकारों ने भी बच्चों को राज्य से जुड़े इतिहास से रूबरू कराना मुनासिब नहीं समझा। अपने राज्य के अमर बलिदानियों प्रति नीति-नियंताओं की सोच को इसी बात से समझा जा सकता है कि टिहरी जनक्रांति के महानायक शहीद श्रीदेव सुमन के जीवन से जुड़े पाठ को शिक्षा विभाग ने पाठ्यक्रम से हटा दिया है।

उत्तराखंड राज्य के लिए कोई आंदोलन हुआ था या नहीं, हुआ था तो किस सन और तिथि से इसकी शुरुआत हुई थी? उत्तराखंड के गांधी कौन कहे जाते हैं, इंद्रमणी बडोनी कौन थे, पृथक राज्य आंदोलन के दौरान मुजफ्फरनगर कांड कब हुआ था।
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राज्य बनने से पहले उत्तराखंड आंदोलन हुआ था, उस दौरान कुछ आंदोलनकारियों को शहादत देनी पड़ी थी, ऐसे तमाम सवालों के जवाब में नगर क्षेत्र के चार राजकीय स्कूलों के बच्चों ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान चुप्पी साध ली।


राजकीय प्राथमिक विद्यालय ढालवाला
उत्तराखंड के गांधी कहे जाने वाले इंद्रमणि बडोनी नगर के मुनिकीरेती क्षेत्र में रहे हैं और यहां उनका मकान भी है। इसी क्षेत्र में स्थापित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में कक्षा चार के आशीष, प्रियंका, तनिका और कक्षा पांच के विशाल, राहुल, अनीता, रेनू ने इंद्रमणी बडोनी का नाम कभी नहीं सुना है। पहाड़ का गांधी किसको कहते हैं यह भी उनकी जानकारी में नहीं है।


राजकीय उच्च प्राथमिक बालिका विद्यालय राजीव ग्राम
इस विद्यालय की कक्षा छह की छात्रा रूपा, कक्षा आठ की छात्रा रावत और साक्षी बिजल्वाण को उत्तराखंड आंदोलन की शुरुआत किस तिथि और सन में हुई, यह तक नहीं मालूम। उन्हें यह तो मालूम है कि आंदोलन में कुछ लोगों को शहादत देनी पड़ी थी, मगर वह इन शहादत देने वालों में श्रीदेव सुमन का नाम शामिल कर देती हैं।


राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राजीव ग्राम
विद्यालय के कक्षा नौ की शोभा जगूड़ी और पवन लेखवार, कक्षा 10 के साहिल, अनुकृति बिजल्वाण, काजल पंत को यह नहीं मालूम है कि उत्तराखंड आंदोलन में उन्हीं के क्षेत्र के राज्य आंदोलनकारी सूर्यप्रकाश थपलियाल ने शहादत दी थी। उन्होंने कभी भी शहीद सूर्यप्रकाश थपलियाल का नाम नहीं सुना। वह उत्तराखंड आंदोलन की शुरुआत 1993 में होना बताते हैं और आंदोलन के दौरान हुए मुजफ्फरनगर कांड की तिथि दो अक्तूबर 1993 बताते हैं।


राजकीय प्राथमिक विद्यालय राजीव ग्राम
विद्यालय के कक्षा पांच के छात्र अमन सिंह, मनीषा कुमारी, ज्योति सहनी, शुभम गुसाईं को उत्तराखंड राज्य स्थापना का वर्ष काल तो याद है, मगर तिथि नहीं। वह बताते हैं कि अंग्रेजों से लड़ाई लड़ने के बाद उत्तराखंड राज्य की स्थापना हुई थी। उन्हें उत्तराखंड के गांधी का पता नहीं है। इंद्रमणी बडोनी का नाम भी उन्होंने कभी नहीं सुना।

उन्हें उत्तराखंड के लिए कोई आंदोलन हुआ था न तो इसका पता है और न ही इस आंदोलन में शहीद हुए लोगों की कोई जानकारी है। उन्हें यह भी नहीं मालूम कि इस आंदोलन में उन्हीं के क्षेत्र के एक आंदोलनकारी ने भी बलिदान दिया था।
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