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छठ पर्व की तैयारी शुरू, 30 हजार लोग पहुंचेंगे

Thu, 03 Nov 2016 01:54 AM IST
rishikesh
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छठ पर्व - फोटो : amar ujala
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दीपावली और भैयादूज के बाद अब तीर्थनगरी में छठ पर्व की तैयारियां जोरशोर से शुरू हो गई हैं। व्रत के सामान की टोकरी (डाला) को नदी घाट पर रखने के लिए समतलीकरण किया जा रहा है। छठ पर्व पर त्रिवेणी घाट पर 30 हजार श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। 1994 से तीर्थनगरी में सामूहिक छठ पर्व मनाने की परंपरा शुरू हुई थी।
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पूर्वांचल वासियों के द्वारा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाए जाने वाले पवित्र छठ पर्व की तैयारियां जोरों से चल रही है। सार्वजनिक छठ पूजन समिति अध्यक्ष रामकृपाल गौतम ने बताया कि चार नवंबर से नहाये-खाये के साथ शुरू होने वाले पर्व की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। बताया कि छठ पूजन सामाग्री की टोकरी (डाला) को घाट पर रखने के लिए जेसीबी की मदद से समतल किया जा रहा है। त्रिवेणी घाट पर पांच हजार ढालन रखने की व्यवस्था की गई है। छह नवंबर को पर्व में 30 हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल होंगे। बताया कि 22 साल से त्रिवेणी घाट पर लोग सामूहिक रूप से छठ पूजा पर्व मना रहे हैं।

वैसे तो तीर्थनगरी में 50 वर्षो से लोग अलग-अलग स्थानों पर छठ पूजा का पर्व मनाते आ रहे हैं। रामकृपाल ने बताया कि चार नवंबर को नहाये-खाये, पांच को खरना, छह को डूबते सूर्य को अर्घ्य और सात नवंबर को सुबह उगते सूर्य को जल चढ़ाकर पूजा का समापन किया जाएगा। संतान, धन, शौर्य, मनइच्छा पूरी होने के बाद महिलाएं छठ पूजा का व्रत करती हैं। इस पर्व की विशेषता यह है कि व्रत को मन्नत पूरी होने के बाद विशेष रूप से रखा जाता है। वहीं, महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि के लिए भी छठ पर्व व्रत रखती हैं। 
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कल से छठ पूूजा की खरीदारी करें
छठ पर्व के पवित्र व्रत में उपयोग में लाई जाने वाली वस्तुएं बाजार में चार नवंबर से मिलेगी। फल विक्रेता संभूनाथ, संजय कुमार ने बताया कि इस व्रत में मुख्यता कच्ची हल्दी, सुथनी, पेड़ सहित अदरक, अनानास, पूरा गन्ना, अरग, सभी फल उपयोग किए जाते हैं। बताया कि बाजार में छठ पूजा का सामान चार नवंबर से आ जाएगा।

इन घाटों में उमड़ेंगे लोग
सूर्य उपासना पर्व को मनाने के लिए उत्तर भारत से हर साल हजारों लोग ऋषिकेश गंगा घाटों पर उमड़ते हैं। दयानंद घाट, त्रिवेणी घाट, स्वामी नारायण घाट पर पूर्वांचलवासी छठ पर्व मनाने के लिए आते हैं। उत्तर भारत के लोग अपने आसपास के इलाकों में नदी के न होने के कारण तीर्थनगरी पहुंचते हैं। 
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