फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आज से पर्यटकों के लिए खुलेगी चौरासी कुटिया

विज्ञापन
विज्ञापन
ऋषिकेश। महर्षि महेश योगी की भावातीन चौरासी कुटिया बुधवार से पर्यटकों के लिए खुलेगी। कोरोना कर्फ्यू के चलते बीते दो महीने से बंद चौरासी कुटिया को खोलने के लिए मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक जेएस सुहाग ने आदेश जारी कर दिए हैं। राजाजी टाइगर रिजर्व अंतर्गत गौहरीरेंज के अधिकारी धीर सिंह ने इसकी पुष्टि की है। बुधवार से पर्यटक चौरासी कुटिया का दीदार कर सकेंगे। गौहरी रेंज अधिकारी ने बताया कि चौरासी कुटिया में पर्यटक सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक ही प्रवेश करेंगे। जिसमें भारतीयों का प्रवेश शुल्क 150 रुपये, वरिष्ठ नागरिकों के लिए 75 रुपये, छात्रों के लिए 40 से 75 रुपये और विदेशी पर्यटकों के लिए 600 रुपये शुल्क रखा गया है।
विज्ञापन

इस तरह विश्वविख्यात हुई चौरासी कुटिया
ऋषिकेश। 1961 में महर्षि महेश योगी ने इस स्थान को भावातीत योग के लिए पार्क प्रशासन से 40 वर्षों के लिए लीज पर ली थी। वर्ष 1968 में इंग्लैंड के मशहूर बीटल्स ग्रुप के चार सदस्य यहां आए थे। ग्रुप के सदस्य यहां करीब चार महीने ठहरे थे। इस दौरान उन्होंने ध्यान, योग के साथ ही यहां रहकर करीब 40 गाने तैयार किए थे। जिन्हें विदेशी आज भी मंत्रमुग्ध होकर सुनते हैं। यहीं कारण है कि विदेशी पर्यटक इस आश्रम को बीटल्स ग्रुप के नाम से जानते हैं। योग के लिए बनी करीब 140 गुबंदनुमा कुटिया और 84 छोटी-छोटी कुटिया पर्यटकों को आज भी अपनी ओर आकर्षित करती हैं। लीज समाप्त होने से पहले महर्षि महेश योगी यह स्थान छोड़कर हॉलैंड चले गए। उसके बाद पार्क प्रशासन ने अपनी जगह को अधिग्रहण कर दिया। धीरे-धीरे यह आश्रम खंडहर में परिवर्तित होने लगा। लेकिन फिर भी विदेशी पर्यटकों का मोह इस आश्रम से कम नहीं हुआ। तब पार्क प्रशासन ने इसे दोबारा पुर्नजीवित करने का प्रयास किया। दिसबर 2015 में पार्क प्रशासन ने इसे दोबारा देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए शुल्क के साथ खोल दिया। तब से लेकर अब तक इस आश्रम से पार्क प्रशासन को करोड़ों रुपये के राजस्व की प्राप्ति हुई है।
विदेशी पर्यटकों की चहलकदमी होगी कम
ऋषिकेश। चौरासी कुटिया में इस बार विदेशी पर्यटकों की चहलकदमी कम देखने को मिलेगी। नतीजन कोरोनाकाल के चलते अंतरराष्ट्रीय सेवाएं बंद हैं। योगनगरी में अब गिनेचुने पर्यटक ही रह गए हैं। वे पर्यटक भी वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में विदेशी पर्यटकों से गुलजार रहने वाली चौरासी कुटिया में इस बार कम ही विदेशी मेहमान नजर आएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें