एसपीएस राजकीय चिकित्सालय परिसर में ब्लड कंपोनेंट भवन बने हुए करीब दो वर्ष से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन अभी तक ब्लड सेपरेटर मशीन नहीं लगी है। मशीन नहीं होने से खून के लिए तीमारदारों को हरिद्वार, जौलीग्रांट और एम्स के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से सरकारी अस्पताल परिसर में वर्ष 2022-23 में ब्लड सेपरेटर यूनिट के लिए करीब नौ लाख की लागत से भवन का निर्माण किया गया था। भवन को बने हुए करीब दो वर्ष से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक भवन में ब्लड सेपरेटर मशीन नहीं लगी है।
इसकी वजह से खून की कमी से जूझ रहे मरीजों को परेशानी हो रही है। 10 नवंबर 2024 को देहरादून में आयोजित बैठक में डीएम सविन बंसल ने सरकारी अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट के लिए मशीनरी और उपकरण आदि स्वीकृत करने की घोषणा भी की थी। करीब चार महीने से अधिक का समय बीत गया है, डीएम की घोषणा धरातल पर नहीं उतरी है।
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क्या काम करता है ब्लड सेपरेटर मशीन
ब्लड में चार कंपोनेंट होते हैं। इनमें लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी), श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्लूबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स शामिल हैं। कंपोनेंट यूनिट की मदद से ब्लड से यह कंपोनेंट अलग किए जाते हैं। इससे फायदा यह होगा कि मरीज को जिस कंपोनेंट की जरूरत होगी, उसे वहीं कंपोनेंट दिया जा सकेगा।
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कोट
ब्लड कंपोनेंट मशीन उच्चाधिकारियों के आदेश पर ही लगेगा। इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। - डॉ. पीके चंदोला, सीएमएस