रमार्थ निकेतन में ऋषिकुमारो के साथ पर्यावरण का संदेश देते स्वामी चिदानंद सरस्वती।स्रोत- परमार्
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परमार्थ निकेतन में अंतरराष्ट्रीय सेल्फ केयर डे के अवसर पर स्वयं की देखभाल विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान स्वामी चिदानंद सरस्वती ने आगामी कांवड़ यात्रा को प्रकृति, संस्कृति, संस्कार और सनातन के संरक्षण का माध्यम बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 28 जुलाई से प्रारंभ होने वाली कांवड़ यात्रा के लिए तीर्थनगरी शिवभक्तों और कांवड़ियों के स्वागत-अभिनंदन के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष की कांवड़ यात्रा केवल आस्था की यात्रा न होकर प्रकृति संरक्षण का भी संदेश दे।
तीर्थनगरी के कण-कण में भगवान शिव का वास है, इसलिए इसकी स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि यात्रा मार्ग में लगने वाले भंडारे सेवा और श्रद्धा के केंद्र हैं। सभी सेवा संस्थाएं एवं श्रद्धालु प्लास्टिक की प्लेट, गिलास और पॉलिथीन के स्थान पर पत्तल, मिट्टी अथवा स्टील के बर्तनों सहित अन्य पर्यावरण अनुकूल सामग्री का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि यह छोटी-सी पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा योगदान साबित हो सकती है।
उन्होंने कांवड़ यात्रियों से अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक श्रद्धालु कम से कम एक पौधा लगाने और उसके संरक्षण का संकल्प लेकर यात्रा को हरित कांवड़ यात्रा बनाए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील पारिस्थितिकी को ध्यान में रखते हुए ध्वनि प्रदूषण, कूड़ा-कचरा और प्राकृतिक संसाधनों के अनावश्यक दोहन से बचना चाहिए। यात्रा के दौरान जीव-जंतुओं, स्थानीय समुदाय और प्रकृति के प्रति सम्मान और सहयोग का भाव रखें।