रेलवे फाटक के पास एक भिखारी की झोपड़ी में आग लगने से बोरे में रखी नोटों की गड्डियां जलकर राख हो गईं। उस समय भिखारी झोपड़ी में मौजूद नहीं था। आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। बाद में घर पहुंचे मानसिक रूप से बीमार भिखारी का कहना था कि बोरे में करीब एक लाख रुपये थे। लेकिन उसे इतने रुपये जलने का कोई मलाल नहीं है।
बुधवार सुबह रेलवे फाटक से गुजर रहे लोग उस समय हैरान हो गए, जब सामने एक भिखारी की झोपड़ी में आग लगने के कारण दस, बीस, सौ, पांच सौ और हजार के कई जले नोट दिखाई दिए। रोजना की तरह रेलवे फाटक के निकट झोपड़ी में रहने वाला मानसिक रूप से बीमार भिखारी रोटी की तलाश में बाहर गया था।
इसी बीच उसकी झोपड़ी में आग लग गई। आग की लपटों को देख मौके पर पहुुंचे लोग हैरान रह गए। उन्होंने देखा कि अलग, अलग गड्डियों में बांधकर लाखों की रकम जलकर स्वाहा हो गई है। कुछ ही देर में झोपड़ी में आग लगने से नोटों के जलने की खबर क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई। बताया जा रहा है कि बुजुर्ग भिखारी दस रुपये से कम भीख नहीं मांगता था।