स्वर्गाश्रम के बाजारों में लकड़ी से बने घरेलू और सजावटी सामान की मांग बढ़ रही है। आकर्षक वुडन उत्पाद देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को खूब लुभा रहे हैं।
स्थानीय व्यापारी अरुण डोबरियाल ने बताया कि समय के साथ लकड़ी का उपयोग बदल गया है। पहले जहां लकड़ी घरों की मूलभूत जरूरत हुआ करती थी, वहीं आज यह सजावट और आकर्षण का प्रमुख माध्यम बन गई है।
उन्होंने बताया कि देश व विदेश के पर्यटक हस्तकला से बने उत्पादों को बड़े शौक से खरीदते हैं। बाजार में नीम की लकड़ी से बने कंघे, योग और मेडिटेशन बेल्स, फ्लावर पॉट, धार्मिक ग्रंथों जैसे रामायण और श्रीमद्भागवत कथा रखने के स्टैंड, अगरबत्ती स्टैंड आदि विशेष रूप से पसंद किए जा रहे हैं।
अगरबत्ती स्टैंड की खासियत है कि इससे केवल सुगंध बाहर आती है और आग लगने का खतरा नहीं रहता। इसके अलावा लकड़ी से बने मसाजर, दीवार घड़ियां, बच्चों के खिलौने और अशोक स्तंभ की प्रतिकृतियां भी बारीक काष्ठकला के साथ तैयार की गई हैं, जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं।
डोबरियाल ने बताया कि राजस्थान की पारंपरिक दादी का संदूक भी लकड़ी से बना होता है, जिसे आज भी शादी-विवाह में विशेष महत्व दिया जाता है। विदेशी पर्यटक खास तौर पर हैंडमेड वुडन उत्पादों को खरीदकर अपने साथ ले जाते हैं, जिससे न केवल भारतीय कारीगरी को वैश्विक पहचान मिल रही है और इससे स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिल रहा है।