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तीसरी लहर के लिए राजकीय चिकित्सालय में इंतजाम नाकाफी

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एसपीएस राजकीय चिकित्सालय। - फोटो : RISHIKESH
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ऋषिकेश। यदि तीसरी लहर आएगी तो एसपीएस राजकीय अस्पताल रेफरल सेंटर बनकर रह जाएगा। वेंटिलेटर सुविधा युक्त 10 बेड का आईसीयू वार्ड तैयार है, लेकिन इन्हें चलाने के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है। ऐसे में आने वाले समय ने यदि केस बढ़े तो एसपीएस चिकित्सालय से मासूमों को रेफर करना पड़ेगा। कोविड की तीसरी लहर से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से ऋषिकेश एसपीएस चिकित्सालय में बैठकों का दौर दौर शुरू हो गया है। अपर महानिदेशक भारती राणा भी कोविड की तीसरी लहर से निपटने के लिए अस्पताल में की जा रही व्यवस्था की जायजा ले चुकी है। यहां अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए छह बेड का एनआईसीयू (नवजात गहन चिकित्सा इकाई) और तीन बेड का पीकू (बाल गहन चिकित्सा इकाई) वार्ड बनाया गया है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर छह बेड के कोविड आइसीयू और 10 बेड के सामान्य आइसीयू को भी बच्चों के लिए रिजर्व रखे जाने की बात कही जा रही है। वार्डों के संचालन के लिए अस्पताल के पास दो बाल रोग विशेषज्ञ हैं। लेकिन अस्पताल में आईसीयू और वेंटिलेटर बेड के संचालन के लिए और तकनीकी स्टाफ नहीं है। स्वास्थ्य महानिदेशालय की ओर से वेंटीलेटर चलाने के लिए स्टाफ नहीं भेजा जा रहा है। ऐसे में चिकित्सा संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद मासूमों को रेफर करना अस्पताल प्रशासन की मजबूरी होगी।
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एम्स में 100 बेड का निकू वार्ड तैयार
-एम्स में बच्चों के लिए 100 बेड का एनआईसीयू तैयार हो गया है। एम्स में ऑक्सीजन प्लांट भी जल्द तैयार होने जा रहा है। आईडीपीएल स्थित राइफलमैन जसवंत रावत अस्थायी कोविड अस्पताल में भी बच्चों के लिए 100 बेड की व्यवस्था की गई है। चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को भी तीसरी लहर से निपटने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यदि राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश से बच्चों को रेफर किया जाएगा तो एम्स ही बच्चों के लिए संजीवनी साबित होगा।
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