नगर निगम का मेयर पद आरक्षित होने से दावेदार मुखर होने लगे हैं। शहरी विकास विभाग को आपत्तियां भेजनी शुरू हो गई हैं। दावेदारों का कहना है कि ऋषिकेश मेयर पद लगातार दूसरी बार आरक्षित किया गया है। जबकि कई स्थानों पर लगातार चार साल से सीट सामान्य रखी गई है।
ऋषिकेश में मेयर का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। पूर्व में यह पद महिला आरक्षित था। लगातार दूसरी बार पद आरक्षित होने से अब दावेदार आवाज उठाने लगे हैं। भाजपा से मेयर पद के दावेदार अमित वत्स ने शहरी विकास विभाग को आपत्ति भेजी है। वत्स का कहना है कि ऋषिकेश शहर पूरे राज्य में एक मात्र ऐसा राज्य हैं जहां वार्डों की आरक्षण स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सिर्फ मेयर पद पर ही बदलाव हुआ है। जब शहरी विकास विभाग से नई नियमावली आई है तो वार्डों की आरक्षण स्थिति में कोई बदलाव क्यों नहीं किया गया। वार्डों में आरक्षण की स्थिति पूर्व की भांति है। इससे स्पष्ट होता है कि किसी एक व्यक्ति को फायदा पहुंचाने के लिए यह सब किया गया है। ऋषिकेश में जो कुछ भी हुआ है वह नियम विरुद्ध है।
सूची में क्रमांक बदले, आरक्षण नहीं
वार्डों में आरक्षण की स्थिति पूर्व की भांति रखी गई है। सिर्फ वार्डों की क्रम संख्या बदली गई है। वार्ड नंबर एक चंद्रेश्वर नगर को क्रम संख्या 11 दिया गया है। यह महिला आरक्षित है। वार्ड नंबर 13 वाल्मीकि नगर को क्रम संख्या एक दिया गया है। यह वार्ड अनुसूचित जाति महिला आरक्षित है। वार्डों में आरक्षण की स्थिति न बदले जाने पर लोग आपत्ति जता रहे हैं।