- वर्ष 2022 से अब तक 50-50 के अनुपात में हो रहे थे प्रवेश
- उत्तराखंड के छात्रों के लिए 85 प्रतिशत सीटें आरक्षित, बाहर के अभ्यर्थियों के लिए 15 प्रतिशत सीटें
ऋषिकेश। आयुष पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए इस बार उत्तराखंड के छात्रों के लिए सीटों में बड़ा बदलाव किया गया है। निजी आयुष महाविद्यालयों में अब प्रवेश 50-50 के अनुपात में नहीं बल्कि 85-15 के अनुपात में होंगे। यानी कुल स्वीकृत सीटों में 85 प्रतिशत सीटों पर उत्तराखंड के अभ्यर्थियों को प्रवेश मिलेगा जबकि 15 प्रतिशत सीटें अखिल भारतीय कोटे के तहत दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रहेंगी।
वर्ष 2022 से पिछले कुछ वर्षों में निजी आयुष महाविद्यालयों में प्रवेश के दौरान 50-50 के अनुपात में सीटें बांटे जाने की व्यवस्था रही है। इस संबंध में शासनादेश भी जारी किया गया था। इसके तहत राज्य और बाहरी अभ्यर्थियों के लिए लगभग बराबर संख्या में सीटें उपलब्ध होती थीं। इससे उत्तराखंड के छात्रों के लिए उपलब्ध राज्य की सीटों की संख्या कम हो जाती थी। अब शासन स्तर पर एनसीआईएसएम के दिशा-निर्देशों के अनुसार व्यवस्था बदलने से राज्य के छात्रों को 85 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश का अवसर मिलेगा। उत्तराखंड आयुर्वेद विवि के अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (एनसीआईएसएम) के दिशा-निर्देशों में राज्य कोटे के लिए 85 प्रतिशत और अखिल भारतीय कोटे के लिए 15 प्रतिशत सीटों का प्रावधान है। इसी व्यवस्था का इस बार कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस बार राज्य के छात्रों के लिए अवसर बढ़ा है। इसलिए नीट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को पहले चरण की काउंसलिंग में ही अधिक से अधिक विकल्प भरने की सलाह दी जा रही है। यदि पहले चरण में बड़ी संख्या में सीटें आवंटित हो जाती हैं तो अगले चरण में सीमित सीटें ही उपलब्ध रह सकती हैं। राज्य कोटे में प्रवेश के दौरान उत्तराखंड की निर्धारित आरक्षण व्यवस्था का भी नियमानुसार लाभ मिलेगा।
650 से अधिक करा चुके पंजीकरण
उत्तराखंड आयुर्वेद विवि में बीएएमएस की सीटों पर प्रवेश के लिए पंजीकरण प्रक्रिया पिछले 24 सितंबर से शुरू हुई थी। करीब 1200 सीटों पर प्रवेश होने हैं, इसके लिए प्रथम चरण में अभ्यर्थी 30 सितंबर तक ऑन लाइन पंजीकरण करा सकते हैं। कुलसचिव डॉ. एके बरनवाल ने बताया कि अब तक करीब 650 से अधिक अभ्यर्थी पंजीकरण करा चुके हैं।
दलालों की सक्रियता का दावा, विजिलेंस से शिकायत
विश्वविद्यालय में बीएएमएस, बीएचएमएस और बीयूएमएस की मॉप-अप राउंड काउंसलिंग से पहले दलालों की संभावित सक्रियता को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन सतर्क है। अभ्यर्थियों और उनके परिजनों को प्रवेश दिलाने के नाम पर ठगी की आशंका को देखते हुए विवि ने पुलिस से काउंसलिंग स्थल और आसपास एलआईयू की निगरानी कराने का अनुरोध किया है।शनिवार को विवि के हेल्पलाइन नंबर पर एक कथित दलाल का फोन आने की बात सामने आई। उसने दावा किया कि उसके संपर्क में 100 से 150 बच्चे हैं, जिन्हें प्रवेश दिलाना है। कुलसचिव डॉ. बरनवाल ने कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल बनकर उससे बात की तो उसने बताया कि कॉलेज प्रति छात्र 25 से 50 हजार रुपये कमीशन देते हैं। उसने प्रति छात्र काउंसलिंग फीस के नाम पर पांच हजार रुपये लेने की बात भी कही।कुलसचिव डॉ. बरनवाल ने बताया कि मामले में विजिलेंस से शिकायत की जा चुकी है।
वर्जन
“इस बार एनसीआईएसएम की गाइडलाइन के अनुसार 85-15 के अनुपात में काउंसलिंग कराई जा रही है। पहले 50-50 के अनुपात में सीटें भरे जाने से उत्तराखंड के छात्रों के लिए अवसर सीमित हो जाता था। अब राज्य के 85 प्रतिशत कोटे की सीटों पर उत्तराखंड के अभ्यर्थियों को प्रवेश का अवसर मिलेगा। डॉ. एसके बरनवाल, कुलसचिव, उत्तराखंड आयुर्वेद विवि।