निजी आयुर्वेद कॉलेजों में प्रवेश पर विश्वविद्यालय ने अब सख्त रुख अपना लिया है। केंद्रीयकृत काउंसलिंग की प्रक्रिया से बाहर जाकर किसी विद्यार्थी को प्रवेश देना कॉलेजों को भारी पड़ेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्परूट किया है कि एनसीआईएसएम के नियमों को नजर अंदाज कर दिया गया कोई भी प्रवेश पूरी तरह अमान्य होगा। ऐसे प्रवेश को लेकर बाद में किसी तरह का विधिक दावा भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही कॉलेजों को फीस से लेकर प्रवेश संबंधी अभिलेख तक विश्वविद्यालय के सामने उपलब्ध कराने होंगे।
शैक्षणिक सत्र 2026-27 में बीएएमएस, बीएचएमएस, बीयूएमएस और एमडी/एमएस (आयुर्वेद) की एनसीआईएसएम से स्वीकृत रिक्त सीटों पर प्रवेश के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर केंद्रीयकृत काउंसलिंग प्रस्तावित है। इसी व्यवस्था को पारदर्शी और नियमबद्ध बनाने के लिए बीते सोमवार सितंबर को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में निजी संस्थानों के परिसर निदेशकों और प्राचार्यों के साथ बैठक की गई थी। बैठक में विवि प्रशासन ने कॉलेजों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि प्रवेश प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी। विवि के कुलसचिव डॉ. एसके बरनवाल सभी कॉलेजों को बीएएमएस, बीएचएमएस, बीयूएमएस और एमडी/एमएस (आयुर्वेद) की वर्षवार फीस और अन्य सभी शुल्कों का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कहा कि कॉलेजों को यह जानकारी अपनी वेबसाइट पर भी अनिवार्य रूप से सार्वजनिक करनी होगी। डॉ. बरनवाल ने स्पष्ट किया कि एनसीआईएसएम की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के लिए सभी संस्थानों को 10 रुपये के स्टांप पर शपथपत्र विश्वविद्यालय में जमा करना होगा।