परमार्थ निकेतन में फ्रांस के योग साधकों का दल पहुंचा। दल के सदस्यों ने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती से भेंट कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। दल के सदस्यों ने चित्रकला के माध्यम से चक्र साधना और ध्यान साधना का संदेश दिया।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा वसुधैव कुटुम्बकम् के सिद्धांतों पर आधारित है, जहां संपूर्ण विश्व एक परिवार है। भारत की धरोहर योग सम्पूर्ण मानवता के लिए एक उपहार है, जो शरीर, मन और आत्मा को जोड़ने का कार्य करती है।
आज के समय में जब विश्व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब योग, ध्यान और आध्यात्मिकता ही वह मार्ग हैं, जो हमें शांति, संतुलन और स्थिरता प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने फ्रांस से आए साधकों को प्रेरित किया कि वे अपने देश लौटकर भी वसुधैव कुटुम्बकम् के मूल्यों को अपनाएं और अधिक से अधिक लोगों तक इसका संदेश पहुंचाएं, ताकि विश्व एक परिवार का मंत्र साकार हो सके। संवाद