ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। नगर पालिका से उच्चीकृत होकर ऋषिकेश को नगर निगम का दर्जा तो मिल गया लेकिन जो अराजकता पिछले चार साल से चली आ रही है वह अब भी कायम है। वर्ष 2014 में शासनादेश जारी हुआ था कि तत्कालीन पालिका प्रबंधन के अधीन जितनी भी दुकानें हैं उनसे सर्किल रेट 140 रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से किराया वसूला जाए। पिछले चार साल से शासनादेश लागू नहीं हो पाया। जिसके कारण अब तक निगम को 2 करोड़ 5 लाख 8 हजार की चपत लग चुकी है। अब अफसरों को समझ में नहीं आ रहा है कि इस घाटे का ठीकरा किसके सिर फोड़ा जाए। दस्तावेजों में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक निगम के अधीन नगर भर में कुल 187 दुकानें हैं। इनसे नाममात्र का किराया वसूल किया जाता है।
बेशकीमती संपत्तियों की बाजार के हिसाब से अहमियत समझते हुए वर्ष 2014 में शासनादेश जारी हुआ कि सभी दुकानों से सर्किल रेट के हिसाब से किराया वसूल किया जाए। यदि सर्किल रेट के हिसाब से किराया वसूली की गई होती तो प्रतिमाह 5 लाख 21 हजार का राजस्व पूर्व की पालिका और मौजूदा नगर निगम को प्राप्त होता। इस हिसाब से सालाना 62 लाख 52 हजार की आय अफसरों की निष्क्रियता की भेंट चढ़ गई। हाल ही में नगर निगम ने घाटे का ब्योरा खंगाला तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। इसके मुताबिक पिछले चार सालों में शासनादेश बेअसर होने के कारण दो करोड़ से ज्यादा की क्षति हुई है।
अफसर देखते रह गए किराएदारों ने बेच दीं दुकानें
नगर निगम अभी कार्यप्रणाली के तौर पर ठीक से संभला भी नहीं है कि अजीबोगरीब गोरखधंधों का खुलासा हुआ है। घटनाक्रम के मुताबिक निगम ने जिन संपत्तियों को मामूली किराए पर सौंप रखा था उन्हें घपलेबाजों ने लाखों रुपये में बेंच डाला है। जानकारी के मुताबिक नगर निगम की 80 फीसदी दुकानें इस गोरखधंधे की भेंट चढ़ गई हैं। गौरतलब है कि आज भी नगर निगम की दुकानें 5 से 10 रुपये प्रतिमाह किराए पर दी गई हैं। चालाक दुकानदारों ने किराए की दुकान अन्य किराएदार को 25 से 30 हजार रुपये प्रतिमाह पर उठाकर मलाई काट रहे हैं।
अब हर दुकान से होगी वसूली
मुख्य नगर आयुक्त प्रेमलाल ने बताया कि नई दरों के हिसाब से अब हर दुकान से 140 रुपये प्रतिवर्ग फुट के हिसाब से किराया वसूली होगी। इसके अलावा दुकान आवंटन से पूर्व 25 से 30 लाख रुपये पगड़ी भी ली जाएगी। उन्होंने कहा कि सहायक नगर आयुक्त को नई प्रणाली तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है। इसके अलावा अवैध लोगों को हटाकर नया आवंटन करने की भी तैयारी है।
कोटस
मुझे इस बारे में अभी जानकारी नहीं है। अगर शासनादेश की अनदेखी हुई तो दोषी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ निलंबन की संस्तुति की जाएगी।
अनिता ममगाईं, मेयर नगर निगम, ऋषिकेश।