ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
शहर में सैकड़ों ऐसी संपत्तियां हैं जो गृहकर के रूप में निगम को औने-पौने दाम अदा कर रही हैं। ये अराजकता नई नहीं बल्कि बीते 15 साल से है। क्षेत्र विस्तार के बाद अब आय बढ़ाने की नौबत आई तो अफसर संपत्तियों का सर्वे कर रहे हैं और नए सिरे से कर दरें निर्धारित करने की कवायद शुरू की है। सर्वे अभियान के तहत अब तक कुल ऐसी 10 संपत्तियां चिह्नित की हैं जो अब तक भूखंड के रूप में दर्ज हैं, जबकि इन भूखंडों पर आलीशान इमारतें बनवाकर कारोबार किया जा रहा है।
पालिका से उच्चीकृत हो निगम बने ऋषिकेश में गृह कर अदायगी का ऐसा ही मामला सामने आया है। पालिका प्रबंधन के कार्यकाल वाली कई संपत्तियां अभीतक भूखंड के रूप में दर्ज हैं और कर अदायगी भी इसी लिहाज से की जा रही है, लेकिन निगम के दस्तावेजों में दर्ज ऐसे सैकड़ों भूखंडों पर इमारतें खड़ी हो चुकी हैं। इनमें व्यावसायिक कारोबार भी हो रहा है। कर के रूप में इन संपत्तियों से निगम को अधिकतम एक हजार रुपये ही मिल रहे हैं। उधर, संपत्ति मालिक उक्त भूखंडों पर इमारतें बनाकर लाखों रुपये प्रतिमाह किराया वसूल रहे हैं। नियमानुसार उक्त संपत्तियों से भवन के रूप में कर वसूली होनी चाहिए।
आय बढ़ाने की सिरदर्दी बढ़ी तो दौड़ शुरू
ऐसा नहीं है कि पालिका प्रबंधन से लेकर निगम प्रशासन को उक्त संपत्तियों की खबर नहीं थी। नगर निगम बनने के बाद जब क्षेत्र का विस्तार हुआ और आय बढ़ाने की सिरदर्दी बढ़ी तो अफसरों में खलबली मच गई है। पिछली बोर्ड बैठक में पार्षदों ने विकास कार्यों और आय के साधन बढ़ाने के समर्थन में हंगामा किया था। इसी के बाद से निगम प्रशासन उन स्रोतों पर नजर दौड़ा रहा है जहां से आय बढ़ाई जा सकती है।
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पूरे शहर में अभियान चलाकर सर्वे किया जा रहा है। इसके तहत उन संपत्तियों की खोजबीन हो रही है जो गलत तरीके से कर अदायगी कर निगम को चूना लगा रहे हैं। इसी के तहत अब तक हरिद्वार रोड, देहरादून रोड सहित अन्य मार्गों की 10 संपत्तियां खोजी गई हैं। उक्त संपत्तियों के मालिक खुद तो प्रतिमाह लाखों का किराया वसूल रहे हैं और निगम को अधिकतम एक हजार रुपये कर अदा कर रहे हैं। एक अप्रैल से ऐसी संपत्तियों पर कारपेट एरिया के हिसाब से टैक्स दरें लागू की जाएंगी।
-उत्तम सिंह नेगी, सहायक नगर आयुक्त