ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर जागरुकता संगोष्ठी आयोजित की गई। इस मौके पर गंगा आरती के माध्यम से तपेदिक के प्रति जागरूक होने का संदेश दिया गया। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि आयुर्वेद और योगमय जीवन अपनाकर अपनी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। तपेदिक मुख्य रूप से बैक्टीरिया के कारण होता है। संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता, बातचीत करता है या हंसता है तो उसके आसपास की हवा दूषित हो सकती है।
तपेदिक का जीवाणु स्वस्थ व्यक्ति के अंगों के साथ-साथ फेफड़ों पर भी हमला कर सकता है। यदि टीबी के रूप में जीवाणु शरीर में सो रहे हैं तब कोई लक्षण दिखायी नहीं देते ऐसी स्थिति को लेटेंट टीबी के रूप में जाना जाता है। एक्टिव टीबी वाले व्यक्ति के शरीर में लक्षणों को अनुभव किया जा सकता है। क्षय रोग एक फैलने वाला रोग है इसे आरंभिक अवस्था में ध्यान नहीं दिया गया तो वह जानलेवा साबित हो सकता है।