ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
सरकारी विभाग करीब एक करोड़ से ज्यादा का पानी मुफ्त में डकार चुके हैं। हालत यह है कि गले तक बकाएदारी में डूबे इन सरकारी विभागों को जल संस्थान ने आरसी भी जारी की, लेकिन भुगतान नहीं किया जा रहा है। पेयजल के सबसे बड़े बकाएदारों में नगर निगम शीर्ष पर है। पालिका प्रबंधन से लेकर निगम का दर्जा पाने तक कुल बकाया 51,20,444 रुपये हो चुका है। इसके बावजूद भुगतान की कोई सूरत नहीं बनी है। हालांकि बकाएदारी से आजिज जल संस्थान ने 10 विभागों को आरसी जारी की है।
सरकारी विभागों के अधिकारियों की उदासीनता और लापरवाही के चलते जल संस्थान का करीब एक करोड़ रुपये बकाया है। इन विभागों को जल संस्थान की ओर से कई बार नोटिस भी भेजा गया है, लेकिन बजट का हवाला देकर पानी के बिल का भुगतान नहीं किया है। अकेले नगर निगम ही जल संस्थान के 51 लाख 20 हजार 444 रुपये का बकाएदार है। यह बकाया राशि बीते 10 वर्षों से भी अधिक की है। जल संस्थान ने कई बार कनेक्शन और अन्य विभागीय कार्रवाई भी की, लेकिन भुगतान की कोई सूरत नहीं बनी। वर्ष 2017 मार्च और 2018 जुलाई में जिलाधिकारी देहरादून एसए मुरुगेशन ने नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त को पानी के बिल का भुगतान करने संबंधी निर्देश दिए थे। इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया। दिलचस्प यह है कि इसी वर्ष माह जुलाई में जिलाधिकारी निगम के प्रशासक भी रहे। यही हाल ऋषिकेश के अन्य सरकारी विभागों का भी है।
इस संबंध में जलकल अभियंता एवीएस रावत ने बताया कि हर वर्ष जल संस्थान की ओर से जिन सरकारी विभाग के पानी का भुगतान बकाया है, उन्हें नोटिस भेजा जाता है। विभागों की ओर से बजट न होने की बात कहते हुए भुगतान नहीं किया जा रहा है। नगर निगम को छोड़कर सभी विभागों के बकाए भुगतान को वसूलने के लिए तहसील प्रशासन को विभागों की आरसी सौंप दी गई है। इस संबंध में उप जिलाधिकारी प्रेमलाल से वार्ता की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन नहीं उठा। एसडीएम का पक्ष आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
जलकर के 11 बड़े बकाएदार
नगर निगम का 51,20, 444 रुपये, पीडब्ल्यूडी साढ़े पांच लाख, सिंचाई विभाग साढ़े तीन लाख, तहसील विभाग 22 हजार रुपये, कोतवाली एक लाख 50 हजार, बीएसएनएल 43 हजार रुपये, विद्युत विभाग साढ़े 11 लाख, जनपथ निर्माण खंड चार लाख 41 हजार, स्वास्थ्य विभाग दो लाख 92 हजार, शिक्षा विभाग एक लाख पांच हजार, मंडी समिति 34 हजार रुपये के अलावा अन्य विभाग भी शामिल हैं।
छह साल में तीन गुना कैसे बढ़ी बकाएदारी : सहायक नगर आयुक्त
सहायक नगर आयुक्त उत्तम सिंह नेगी का कहना है कि वर्ष 2010 में नगर पालिका परिषद की ओर से जल संस्थान को बताया गया था कि यहां अवैध कनेक्शन चल रहे है, इनमें से कई तो बंद पड़े हैं। जल संस्थान इनका मीटर भी हमारे ऊपर चला रहा है। वर्ष 2012 में जल संस्थान ने 13 लाख रुपये की डिमांड की थी। 2013 से अब तक इन छह साल में 38 हजार रुपये की डिमांड कैसे बढ़ गई है। इसी साल माह अक्तूबर में निगम की ओर से जल संस्थान विभाग को नगर में नगर निगम के फिजिकल वेरिफिकेशन कराने को कहा गया है। इससे यह साफ हो जाएगा कि वास्तव में हमारे कितने कनेक्शन चल रहे है। साथ ही यह राशि छह साल में तीन गुना कैसे बढ़ गई है।
10 साल से क्यों मौन है जल संस्थान : मेयर
बकाएदारी को लेकर मेयर अनिता ममगाईं का कहना है कि जल संस्थान के पानी के भुगतान का प्रकरण मेरे कार्यकाल का नहीं है और न ही इस संबंध में मुझे कोई जानकारी है। यदि बीते 10 साल से 51 लाख रुपये का बकाया है, तो जल संस्थान पर भी प्रश्न उठना चाहिए। जल संस्थान ने इस संबंध में कार्रवाई क्यों नहीं की। क्यों वह 10 साल से मौन बैठा रहा। बहरहाल इस संबंध में निगम के अधिकारियों से वार्ता की जाएगी कि वास्तव में कितना बकाया है, और क्या वजह है।