ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
श्यामपुर। नीमकरोली नगर स्थित नव चेतना विद्यालय में बुधवार को अमर उजाला की ओर से अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल्स महाभियान कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के पहले चरण में बालिकाओं को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी गई। दूसरे चरण में योग तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। मुख्य अतिथि डॉ. वंदना राजपूत ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस दौरान उन्होंने बालिकाओं के शारीरिक, मानसिक विकास प्रक्रिया और भावनात्मक परिवर्तन की जानकारी दी।
डॉ. वंदना ने कहा कि 10 से 16 वर्ष की आयु बालिकाओं के परिपक्व होने की क्रमिक प्रक्रिया है। इस दौरान बालिकाओं में शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक परिवर्तन होते हैं। इस अवधि में बालिकाओं को अपनी जिज्ञासा के बारे में नि:संकोच होकर चुप्पी तोड़ी चाहिए। उनका मुखर होना ही सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है। इसके अलावा प्रोजेक्टर के माध्यम से बालिकाओं को पीरियड्स (मासिक धर्म) संबंधी जानकारी दी। डॉ. वंदना ने कहा कि शरीर में आने वाले बदलाव पर अपने माता-पिता से बिना संकोच बात करनी चाहिए। इसके अलावा बालिकाओं को ‘अपराजिता’ का भावानार्थ समझाया गया। वक्ताओं ने बताया कि अपराजिता मां दुर्गा का एक रूप है और बालिकाओं को अपराजिता बनना है। इस दौरान बालिकाओं ने कभी न हारने वाली अपराजिता बनने की शपथ ली। कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं को पीरियड्स की दर्द निवारक दवाइयां भी वितरित की गईं। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने अमर उजाला की मुहिम की खूब सराहना की। इस मौके पर प्राग शर्मा, संजीव वर्मा, पतंजलि योग समिति की अध्यक्ष सुनीता खंडूरी, महामंत्री पुष्पा मित्तल, पार्षद विपिन पंत, सामाजिक कार्यकर्ता शीलू पंत, साहित्यकार डॉ. विक्रम अलंकार, मैत्री संस्था की अध्यक्ष कुसुम जोशी समेत बड़ी संख्या में बालिकाएं मौजूद रहीं।
योग व सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन
अपराजिता कार्यक्रम के दूसरे चरण में नव चेतना विद्यालय के बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस अवसर पर बालिकाओं ने मयूर आसन, शीर्षासन, वृश्चिक आसन सहित कई योग क्रियाओं का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में पतंजलि योग समिति की अध्यक्ष सुनीता खंडूरी व महामंत्री पुष्पा मित्तल ने कहा कि योग ही जीवन है। योग से जटिल से जटिल बीमारियों के इलाज संभव है।
कातिल को मिले कड़ी सजा
आयोजन के दौरान पौड़ी में जलाकर मारी गई बेटी पर दुख व्यक्त करते हुए उसके कातिल को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की गई। साथ ही कहा गया कि जो लोग मानसिक रूप से विकृत हैं, तथा जघन्य आपराधिक कृत्य करते हैं। समाज में उन लोगों का चिह्नीकरण किस तरह हो सकता है उस पर भी चिंतन होना चाहिए।
शिक्षिकाओं की प्रतिक्रिया
पहले कहा जाता था कि लड़कियों के अपने घर नहीं होते, अंबर छूना चाहती हैं पर अपने पर नहीं होते, लेकिन सच ये है कि उड़ान परों से नहीं हौंसले से होती है। अमर उजाला नारी शक्ति की उड़ान का सारथी बनकर आगे आया है।
-नीलम नवानी, प्रधानाचार्य, नव चेतना विद्यालय
अपराजिता कार्यक्रम से नारी शक्ति में चेतना का विकास होता है। इस तरह के कार्यक्रमों से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है।
-गीता वर्मा, शिक्षिका
नारी आज हर क्षेत्र में आगे आ रही हैं। ऐसे में यदि उनको ओर प्रोत्साहन मिलता है तो वो किसी भी क्षेत्र में अपने झंडे गाड़ सकती हैं।
-नैन्सी भारद्वाज, शिक्षिका
अपराजिता कार्यक्रम से हमें सीखने को मिला कि मार्ग में कई बाधाएं आएंगी, लेकिन उनसे घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि उनका मुकाबला करने की जरूरत है।
-हिमानी जोशी, छात्रा
अपराजिता कार्यक्रम भविष्य में नारी सशक्तिकरण को लेकर मील का पत्थर साबित होगा। मेरा मानना है कि जगह-जगह ऐसे क्लब बनने चाहिए जहां नारी शक्ति अपनी बात रख सके।
-प्रिया, छात्रा
अगर बालिकाओं को घर, परिवार व समाज का पूरा सहयोग मिले तो वो मां, बेटी, बहन, पत्नी के रूप अपने परिवार, समाज व देश के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका दे सकती हैं।
-सोनिया कोठियाल, छात्रा