अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में कर्मचारियों के प्रदर्शन और सात बिंदुओं पर सहमति बनने के बाद अस्पताल प्रशासन की तहरीर पर पुलिस ने उत्तराखंड जन एकता पार्टी के संस्थापक सदस्य कनक धनाई समेत 40 लोगों पर कार्रवाई की है। आरोपियों पर परिसर में भीड़ जमा करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और तोड़फोड़ सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
शुक्रवार को एम्स प्रशासन ने संस्थान में कार्य कर रहे 98 आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने का नोटिस जारी किया था। शनिवार को सुरक्षाकर्मियों ने कर्मचारियों को अस्पताल के भीतर जाने से रोक दिया। कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार की सूचना पर उत्तराखंड जन एकता पार्टी के संस्थापक सदस्य कनक धनाई अपने समर्थकों के साथ एम्स पहुंचे। इसके बाद कर्मचारी प्रशासनिक भवन में जबरन दाखिल होकर प्रदर्शन करने लगे। इस बीच आउटसोर्स कर्मियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी हुई। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो वहां प्रशासनिक भवन का एक दरवाजा भी टूटा हुआ था। सुबह से शाम तक चले हंगामे के बाद एम्स और आउटसोर्स एजेंसी के आश्वासन पर कर्मचारियों ने धरना स्थगित कर दिया था। शनिवार को एम्स के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शशिकांत की ओर से कनक धनाई समेत 40 लोगों के खिलाफ तहरीर दी गई। कोतवाली निरीक्षक रवि सैनी ने बताया कि पुलिस ने कनक धनाई निवासी खांडगांव, रायवाला, ऋषिकेश, जिला देहरादून पर परिसर में भीड़ एकत्र करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और तोड़फोड़ से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इसके अलावा 39 अन्य के खिलाफ भी मुकदमा लिखा गया है।
कोविड नियमों के उल्लंघन पर भी कार्रवाई
ऋषिकेश। एम्स में प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों की भारी भीड़ एकत्र हो गई। इस दौरान कई नेताओं, समर्थकों और कर्मचारियों ने मास्क भी नहीं पहना था। पुलिस ने उत्तराखंड जन एकता पार्टी के संस्थापक सदस्य कनक धनाई सहित नौ लोगों पर कोविड नियमों के उल्लंघन से संबंधित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। कोतवाली निरीक्षक रवि सैनी ने बताया कि नौ लोगों पर धारा 188, 269, 270, 51 आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की है। कनक धनाई, टीडीएस मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के कर्मचारी युद्धवीर सिंह, नितिन कुमार, रूबी शर्मा, विक्रम पंवार, मोहित, पिंकी पैन्यूली, सुलेना मंडल और सुष्मिता जोशी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
वर्जन.....
एम्स प्रशासन मुकदमा दर्ज कर कर्मचारियों की आवाज को दबाने का कार्य कर कर रहा है। आउटसोर्स एजेंसी लोगों से एम्स में भर्ती के लिए 30-30 हजार रुपये सिक्योरिटी फीस के नाम पर लेती है। इसके बाद हर माह कर्मचारी के वेतन से चार हजार रुपये काट लिए जाते हैं। कर्मचारी के हाथ केवल आठ हजार रुपये लगते हैं। सिक्योरिटी फीस के तौर पर लिए गए 30 हजार रुपये कर्मचारी को वापस नहीं किए जाते हैं। आउटसोर्स एजेंसी कर्मचारियों को बाहर कर नए कर्मचारी रख हर साल लाखों के वारे न्यारे कर रही है। एम्स और आउटसोर्स एजेंसी की मिलीभगत से संस्थान में भर्ती की आड़ में हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर करने तक संघर्ष जारी रहेगा।
-कनक धनाई, संस्थापक सदस्य, उत्तराखंड जन एकता पार्टी