ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
डोईवाला। विश्व सिजोफ्रेनिया दिवस के उपलक्ष्य में बुधवार को स्वामीराम हिमालयन यूनिवर्सिटी में एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने आम लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच बीमारी के प्रति जागरूकता पर जोर दिया।
हिमालयन कॉलेज ऑफ नर्सिंग के मेंटल हेल्थ विभाग की ओर से आयोजित सेमीनार का उद्घाटन मुख्य अतिथि नर्सिंग प्रिंसिपल डॉ. संचिता पुगाजड़ी ने किया। डॉ. पुगाजड़ी ने कहा कि सिजोफ्रेनिया एक गंभीर बीमारी है। इसका निदान उचित काउंसिलिंग के जरिए किया जा सकता है। बीमारी से पीड़ित व्यक्ति वास्तविक और काल्पनिक वस्तुओं को समझने में भूल कर बैठता है। दुनिया में एक प्रतिशत लोग सिजोफ्रेनिया से ग्रसित हैं। अमूमन यह बीमारी महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक होती है। सेमीनार का मकसद आम जनता और स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच जागरूकता पैदा करना है ताकि उन्हें इस मानसिक बीमारी से लड़ने में सक्षम बनाया जा सके। इसमें नर्सिंग स्टॉफ को मुख्य भूमिका निभानी होगी। उनके माध्यम से ही दुनिया में मौजूद मिथक और अंधविश्वास दूर किया जा सकता है। सेमीनार की चेयरपर्सन ग्रेस मैडोना सिंह ने कहा कि सामाजिक समारोह में अलग रहने, शरीर को बेढंगे तरीके से रखना आदि इस बीमारी के मुख्य लक्षण हैं। इन लक्षणों की पहचान होने पर उचित काउंसिलिंग शुरू करनी चाहिए। सेमीनार में डॉ. अचला गायकवाड़, जे मनोरंजनी, चेतना गौतम, संध्या नेगी, पूजा धस्माना, कृष्णमोहन, जयंत अभिषेक गिडोन ने सिजोफ्रेनिया के प्रबंधन की जानकारी दी।