ब्यूरो/अमर उजाला। ऋषिकेश। नववर्ष को आध्यात्मिक रूप से मनाएं। शराब की जगह साधना, फोन के बदले मौन, शोर के साथ नहीं बल्कि शांति के साथ मनाए। विगत वर्ष के सभी नकारात्मक विचारों को त्याग कर नकारात्मक चिंतन को छोड़ कर सकारात्मक सोच के साथ नववर्ष की शुरूआत करें। यह बात परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदांनद सरस्वती ने कही। मंगलवार को परमार्थ निकेतन में योगाचार्यों की ओर से आयोजित तीन दिवसीय नव वर्ष योग सत्र का संपन्न हो गया। योगाचार्यों ने योग करो मौज करो का महासंकल्प लिया। नव वर्ष के आगमन पर प्रात:काल यज्ञ मंत्रों एवं वेद के विद्वानों की ओर से वेद पाठ करते हुए सभी श्रद्धालुओं ने यज्ञ में पूर्णाहुति डाली।
स्वामी चिदांनद सरस्वती ने कहा कि यह भारतीय नववर्ष नहीं है, मगर सबके लिए कल्याण प्रद हो, क्योंकि संपूर्ण धरती माता है। पांच दिवसीय सत्र में प्राणायाम, योगासन, आध्यात्मिक प्रश्नोत्तरी, मौन सत्र, सूर्य उदय, सूर्य अस्त साधना, ध्यान, मंत्र उच्चारण साधना, हवन और अन्य आध्यात्मिक सत्रों का आयोजन किया गया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने योगाचार्यों को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प कराकर स्पेन, बहामा, टर्की, वियतनाम, मालदीव, गिनी बिसाऊ, सिंगापुर व चीन से आए अतिथियों को रुद्राक्ष का पौधा भेंट कर नव वर्ष की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर राजदूत जोस और स्पेन के अन्ना आदि उपस्थित रहे।