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क्षतिग्रस्त मार्ग पर हिचकोले खाकर करनी पड़ेगी चारधाम यात्रा

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। चारधाम यात्रा संचालन के मुख्य केंद्र तीर्थनगरी में ही व्यवस्थाओं की दशा खराब है। बाजार से लेकर चारधाम बीटीसी परिसर तक व्याप्त अव्यवस्थाओं से यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। करीब छह वर्ष से प्रस्तावित बीटीसी गंगोत्री हाईवे संपर्क मार्ग इस साल भी यात्रा के लिए तैयार नहीं हो पाया है। बीते वर्ष यात्रा व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने यात्रा के लिए निगम प्रशासन को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम जाने वाले यात्रा वाहनों की आवागमन की सुविधा के लिए मार्ग के डामरीकरण के निर्देश दिए थे। फिलहाल हाईवे का काम भी लेटलतीफी का शिकार होकर रह गया है।
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चारधाम यात्रा में तीर्थों के दर्शन को हर वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु तीर्थनगरी पहुंचते हैं। शहर में प्रवेश करते ही बाजार से लेकर चारधाम बस ट्रांजिट कंपाउंड तक जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। नगर के विभिन्न बाजारों में सड़कों तक अतिक्रमण का जाल फैला हुआ है। यात्रा सीजन होने के बावजूद शहर का न तो अतिक्रमण खत्म हो पा रहा है न ही जाम से मुक्ति मिल रही है। यात्रा शुरू होने में एक माह से कम का समय रह गया है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने अतिक्रमण को लेकर बाजार में कुछ दिन औपचारिक अभियान चलाकर खानापूर्ति की थी। अतिक्रमण की यही स्थिति बीटीसी परिसर में भी बनी हुई है। यहां यात्रा के मद्देनजर पसरे अतिक्रमण को हटाने का दावा हर वर्ष किया जाता है। मौजूदा स्थिति यह है कि यहां अतिक्रमण जोरों पर है।

बीटीसी मार्गों पर भारी वाहनों का संचालन जारी
मालवाहक वाहनों का चारधाम यात्रा बस ट्रांजिस्ट कंपाउंड से कोई लेना देना नहीं है, लेकिन प्रशासन की अनदेखी के कारण पुलिस माल वाहक वाहनों का संचालन बीटीसी के प्रवेश व निकासी मार्गों पर कर रही है। निर्माण सामग्री से लदे ट्रक व ट्रालियां हर रोज कंपाउंड के प्रवेश व निकासी मार्गों पर बेरोकटोक संचालित हो रही हैं। इतना ही नहीं बीटीसी बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने वाले संपर्क मार्ग पर दिन भर माल वाहनों में लोडिंग व अनलोडिंग का सिलसिला जारी है। इससे बद्रीनाथ-केदारनाथ के यात्री वाहनों के साथ ही यहां से विभिन्न मार्गों के लिए संचालित होने वाले निगम की बसों का आवागमन भी बाधित होता है।
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कोट्स
गंगोत्री और यमुनोत्री धाम जाने वाला मार्ग वन विभाग के अंतर्गत आता है। वन विभाग की ओर से इस मार्ग के डामरीकरण के लिए कोई सहमति नहीं बन सकी है। लिहाजा इस मार्ग की स्थिति जस की तस बनी हुई।
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- आनंद सिंह मिश्रवाण, असिस्टेंट इंजीनियर नगर निगम
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