ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। रामकथा के श्रवण से सभी का अंत: करण शुद्ध होगा। इससे से हम मानवता की और अधिक सेवा कर सकते हैं। राम कथा के माध्यम से सभी के मन में एक नए भारत के निर्माण का संकल्प उभरे और यही संकल्प भारत को विश्वगुरु बनाएगा। यह बात राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने परमार्थ निकेतन में श्रीराम कथा के शुभारंभ अवसर पर कही। बृहस्पतिवार को परमार्थ निकेतन आश्रम में आयोजित श्रीराम कथा का शुभारंभ राज्यपाल बेबी रानी मौर्य, परमार्थ के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती और कथा वाचक मुरलीधर ने किया। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि विश्व के देशों की उन्नति देशभक्ति की भावना से ही होती है। देश प्रेम के साथ देश का वातावरण, पर्यावरण, नदियों की स्थिति का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि गंगा हमारी मां है, हम उनके बिना नहीं रह सकते हैं। हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों को प्रदूषण से मुक्त रखना है।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि श्रीराम कथा गंगा माता, गो माता और धरती माता को समर्पित है। रामायण वास्तव में जीवन के सभी संबंधों का आदर्श है। यह ग्रंथ सभी युगों के लिए संबंधों को जीवंत बनाए रखने के आदर्श रूप को प्रस्तुत करता है। इसमें भाई-भाई का प्रेम, पिता पुत्र का प्रेम, मां और बेटे का प्रेम, पति-पत्नी का प्रेम, राजा और प्रजा का प्रेम और सबसे अधिक भक्त और भगवान के प्रेम को प्रकट किया गया है। इन सभी संबंधों में भक्ति, त्याग, तपस्या, समर्पण एवं निष्ठा का भाव यथार्थ रूप में परिलक्षित होता है। रामायण अपने आप में आदर्श जीवन गाथा है, जो सदियों से जीवित रही है।
इस मौके पर कथा वाचक मुरलीधर ने कहा कि भारतीय संस्कृति पर्यावरण रक्षण की संस्कृति है। यहां पर नदियों को भी मां का दर्जा दिया गया है, इनकी रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। भारत की संस्कृति तो वृक्षों व प्राणियों के भी सत्कार की संस्कृति है और श्रीराम कथा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इस अवसर पर पीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्र दास, साध्वी भगवती सरस्वती, मीना रमावत आदि उपस्थित रहे।