अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में डिपार्टमेंट ऑफ ट्रॉमा सर्जरी की ओर से ट्रॉमा केयर पर आधारित एटीएलएस व एटीसीएन की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हुई। कार्यशाला में एम्स चिकित्सकों के साथ नर्सिंग स्टाफ और देश के विभिन्न मेडिकल संस्थानों के विशेषज्ञ व प्रतिभागी चिकित्सक भाग ले रहे हैं। कार्यशाला मेें एम्स निदेशक डा. रविकांत ने जीवन की रक्षा के लिए हेलमेट को अनिवार्य बताया।
शनिवार को मुख्य अतिथि एम्स निदेशक डा. रविकांत ने तीन दिवसीय नेशनल ट्रॉमा केयर वर्कशॉप का विधिवत शुभारंभ किया। इस मौके पर एम्स निदेशक ने कहा कि जिस तरह से युद्ध से पूर्व सैनिक ट्रेनिंग पूरी कर दक्षता हासिल कर लेते हैं, उसी तरह आपातकालीन स्थितियों से पूर्व चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ का पूरी तरह से प्रशिक्षित होना जरुरी है।
इस मौके पर एटीएलएस विशेषज्ञ सफदरजंग हास्पिटल के डॉ. निक्की सभरवाल, केजीएमयू लखनऊ के प्रोफेसर विनोद जैन, समीर मिश्रा, दिल्ली सरकार के डॉ. सुनील कुमार, पीजीआई चंडीगढ़ से डॉ. मंजू डंडापानी, जिपमर पुदुचेरी के डॉ. रवीश कुमार, एम्स दिल्ली की डॉ. पूनम जोशी, महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज जयपुर के डॉ. एर्निट जॉर्ज ने ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट पर व्याख्यान दिए।
कार्यशाला में ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद कमर आजम, डॉ. अमूल्य रतन, नर्सिंग से डॉ. राजेश कुमार व मेडिकल एजुकेशन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शालिनी राव, एमएस डॉ. ब्रह्मप्रकाश, रेडियोथेरेपी विभागाध्यक्ष मनोज गुप्ता, डीन नर्सिंग सुरेश शर्मा, ईएनटी विभागाध्यक्ष सौरभ वार्ष्णेय, डॉ. मनु मल्होत्रा, डीन प्लानिंग लतिका मोहन आदि मौजूद रहे।