ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
चंद्रभागा नदी पर मायाकुंड के समीप बसी सौ से अधिक अवैध झुग्गी झोपड़ियां खतरे की जद में हैं। पूर्व में कई बार चंद्रभागा नदी यहां पर अपना रौद्र रूप दिखा चुकी है। इसमें कई झुग्गी झोपड़ियां बाढ़ की भेंट चढ़ चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक यहां से झुग्गी झोपडियों को नहीं हटाया गया है।
उत्तराखंड में मानसून अपनी दस्तक दे चुका है और बरसात का मौसम शुरू होने वाला है। बरसाती दिनों में चंद्रभागा नदी में बाढ़ का खतरा लगातार बना रहता है। पूर्व में भी कई बार चंद्रभागा नदी यहां पर अपने उफान में आकर तबाही मचा चुकी है। वर्तमान में नदी का स्तर भी काफी ऊंचा उठ गया है। वर्ष 1995 में आखिरी बार चंद्रभागा नदी में खनन का काम खुला था। इसके बाद से चंद्रभागा का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे आसपास के क्षेत्रों सहित चंद्रभागा से सटे इलाकों में लगातार बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
चंद्रभागा पुल के नीचे और मायाकुंड के समीप बसी झुग्गी झोपड़ियों में करीब 800 से अधिक लोग रहते हैं। बरसाती दिनों में यह लोग लगातार खतरे के साये में जीवन यापन करते हैं। पूर्व में कई झुग्गी झोपडियां चंद्रभागा नदी में बाढ़ की भेंट चढ़ चुकी हैं। बरसाती दिनों में इन झुग्गी झोपडियों में रहने वाले लोगों को प्रशासन, पुलिस और नगर निगम की सहायता से यहां से हटा दिया जाता है, लेकिन वोट बैंक की राजनीति के चलते झुग्गी झोपड़ियां दोबारा बसा दी जाती हैं। इस संदर्भ में सिंचाई विभाग के अफसरों का पक्ष जानने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो सका। अ
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वार्ड-3 में चुनाव के कारण 10 जुलाई तक आचार संहिता लगी है। आपदा को देखते हुए इसके बाद तत्काल चंद्रभागा पुल के नीचे और मायाकुंड के समीप से अवैध झुग्गी झोपड़ियां हटाई जाएंगी।
-अनिता ममगाईं, मेयर, नगर निगम ऋषिकेश