फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिना नीलामी बेच दिया लाखों का कबाड़

विज्ञापन
विज्ञापन
ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। नगर निगम में कबाड़ घोटाला मामला सामने आया है। यहां निगम के कुछ अधिकारियों ने बिना नीलामी शहर से हटाए गए होर्डिंग्स और यूनिपोल का कई कुंतल कबाड़ गुपचुप तरीके से औने पौने दामों पर बेच डाला। निगम के ही एक कर्मचारी ने इस मामले में मेयर, नगर आयुक्त से लेकर विभागीय मंत्री से इसकी शिकायत कर दी है। मामला उछलने के बाद निगम में हड़कंप की स्थिति बन गई है। यदि मामले की जांच होती है तो औने-पौने दामों पर कबाड़ बेचने वालों की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है।
विज्ञापन

शहर भर में करीब 50 होर्डिंग और यूनिपोल अवैध तरीके से संचालित होते पाए गए थे। इसके एवज में कई वर्षों से संचालकों से कोई शुल्क नहीं लिया गया। मामला जब नगर आयुक्त चतर सिंह चौहान के संज्ञान में आया तो उन्होंने विज्ञापन जारी कर सभी अवैध यूनिपोल और होर्डिंग्स को 15 दिन के भीतर उतारने के आदेश जारी कर दिए। इसी क्रम में मियाद पूरी होने के बाद निगम की ओर से एक नोडल एजेंसी गठित की गई और अवैध यूनिपोल और होर्डिंग को जब्त करने का अभियान चलाया गया, और शहर में लगे अवैध यूनिपोल और होर्डिंग्स निकालने का अभियान छेड़ दिया। इस दौरान टीम ने कई कुंतल कबाड़ एकत्र किया जोकि बिना नीलामी प्रक्रिया अपनाए चहेतों को बेच दिया।

50 कुंतल कबाड़ को दिखाया महज 8.50 कुंतल
निगम कर्मचारी की शिकायत के मुताबिक निगम के कुछ अफसरों के इशारे पर सरकारी वाहन पर 50 कुंतल कबाड़ महज 8.50 कुंतल दर्शाकर बेच दिया। कबाड़ व्यापारी राजेश ने बताया कि दो दिन पहले निगम की गाड़ी से मेरे यहां लोहे का कबाड़ गिरवाया गया। रसीद के मुताबिक राजेश के गोदाम पर साढ़े 24 रुपए प्रति किलो के हिसाब से करीब 56 कुंतल लोहे का कबाड़ गिरवाया गया। इस हिसाब से करीब डेढ़ लाख मूल्य का कबाड़ राजेश के हिस्से आया। जबकि निगम अधिकारियों की मानें तो कबाड़ बेचकर निगम ने अब तक 50-60 हजार रुपये का मुनाफा कमाया है। इसी तरह नगर के अन्य कबाड़ियों को भी कबाड़ बेचा गया है। बताया जा रहा है कि नगर भर में करीब 24 यूनिपोल जब्त किए गए हैं। इस हिसाब से कई टन लोहे का कबाड़ घोटाले की भेंट चढ़ गया है। यही नहीं निगम प्रशासन के कई नजदीकी व्यापारी यूनिपोल और होर्डिंग्स जब्त होने से पहले ही ले जाने में कामयाब हो गए। ऐसे कबाड़ का निगम के पास कोई हिसाब ही नहीं है।
विज्ञापन


कोट्स
सारी प्रक्रिया नगर आयुक्त के निर्देशन में हुई है। हमारे पास कबाड़ रखने के लिए जगह नहीं है। इसलिए मौके से ही निस्तारित किया जा रहा है। जो व्यापारी ज्यादा कीमत दे रहा है उसी को कबाड़ बेचा जा रहा है। अब तक करीब 50 से 60 हजार रुपये निगम कोष में जमा किए गए हैं। जिस भी कर्मचारी ने शिकायत की है वह उसकी व्यक्तिगत समस्या है। कबाड़ निस्तारण में कोई अनियमितता नहीं बरती गई है।
विज्ञापन

- उत्तम सिंह नेगी, सहायक नगर आयुक्त, नगर निगम
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें