ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । परमार्थ निकेतन में सोमवार को संतों का समागम हुआ। इस दौरान आगामी कुंभ को लेेकर गहन मंत्रणा हुई। तय हुुआ कि हरिद्वार महाकुंभ को प्लास्टिक मुक्त, अध्यात्म के साथ सामाजिक सरोकार, वैश्विक समस्याओं का केंद्र, योग व आयुर्वेद को विश्व के कोने-कोने तक पहुंचाने और पर्यावरण संरक्षित कुंभ बनाया जाएगा। संत संवाद में योगगुरु स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण, महामंडलेश्वर स्वामी महेशानंद, महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश्वरानंद, महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद, महामंडलेश्वर स्वामी अर्जुनपूरी शामिल रहे।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि कुंभ एक ऐसा मंच है जहां से भीतरी और बाहरी पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखने के लिए हम सभी को मिलकर कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अब कुंभ में अध्यात्म के साथ समसामयिक समस्याओं पर विचार विमर्श होना चाहिए। कहा कि आज सबसे बड़ी समस्या है ग्लोबल वार्मिंग, एकल प्लास्टिक उपयोग, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण जैसी अनेक पर्यावरणीय की है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड योग और अध्यात्म की भूमि है। यहां पर होने वाला कुंभ नये आयामों को साथ लेकर आएगा और लोगों का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कुंभ के दौरान जगह-जगह पर आयोजित होने वाले भंडारों में प्लास्टिक का उपयोग न किया जाए।