ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। शहर के कई इलाकों में स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए नगर निगम ने बीते फरवरी में टेंडर पारित किया था। बोर्ड से पारित होने के बाद अपनाई गई टेंडर प्रक्रिया अचानक निरस्त कर दी गई। लिहाजा, शहर के अधिकांश क्षेत्र अंधेरे में डूबा हुआ है। टेंडर निरस्त होने के मामले में मेयर अनिता ममगाईं का कहना है कि आचार संहिता के कारण टेंडर को लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता था, लिहाजा टेंडर निरस्त करना पड़ा। इस घटना को लेकर सियासी हलकों में भी तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं।
कई पार्षदों का कहना है कि जब टेंडर पास हो चुका था तो पथ प्रकाश की व्यवस्था सुचारु करने में कोई अड़चन नहीं थी। आरोप यह भी लग रहे हैं कि निजी स्वार्थों के चलते टेंडर जानबूझकर निरस्त करवाया गया। कुछ पार्षदों का तर्क यह भी है कि जब टेंडर हो चुका था तो निरस्त करने की बजाए उसे विस्तार दिया जा सकता था। जब बस अड्डे की पार्किंग ठेके को आचार संहिता के चलते विस्तार दिया जा सकता है, तो पथ प्रकाश के टेंडर को निरस्त करने की क्या मजबूरी रही होगी।
कोट्स
टेंडर प्रक्रिया के लिए विज्ञापन पर खर्च हुआ पैसा जाया हो गया है। इसकी भरपाई कैसे की जाएगी, इस पर विचार किया जाएगा। आचार संहिता के बाद दोबारा टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
- अनिता ममगाईं, मेयर, नगर निगम