ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। अवैध कब्जों और संपत्तियों के खुर्दबुर्द के मामलों में नगर निगम के अधिकारी कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। हालात यह हैं कि जिन अवैध गतिविधियों पर जांच रिपोर्ट आ चुकी है, उन पर न तो कार्रवाई हो रही है और न ही जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है। बता दें कि त्रिवेणी घाट स्थित गंगा सभा का कार्यालय बिना आवंटन के अवैध रूप से संचालित होने की खबर अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसके बाद निगम प्रशासन ने संपत्ति की किराया वसूली का ब्योरा तैयार किया। अब रिपोर्ट आने के बाद कर अधीक्षक सहित नगर आयुक्त मामले को दबाने में लगे हुए हैं।
यह कोई पहला मामला नहीं है जिसका खुलासा होने के बाद ठंडे बस्ते में डाल दिया गया हो। कृष्णा माई धर्मशाला और बस अड्डे के समीप कांजी हाउस की जमीन पर अवैध तरीके से दुकान बनाने का मामला भी सामने आया। इनमें से कांजी हाउस पर अतिक्रमण कर बनाई गई दुकान का मौका मुआयना भी मुख्य नगर आयुक्त प्रेमलाल ने किया था। इसी दौरान एक हफ्ते की मोहलत भी दुकानदार को दी गई थी। मोहलत बीत गई और जांच रिपोर्ट भी आ गई जिसमें दुकान को ध्वस्त करने की सिफारिश की गई है। इसके बाद अधिकारी चुप्पी साधकर बैठक गए हैं।
पल्ला झाड़ने में लगे हैं अधिकारी
निगम की संपत्तियों के खुर्द बुर्द होने, कर वसूली और अतिक्रमण खाली करवाने के सवाल पर मुख्य नगर आयुक्त का कहना है कि मुझे कुछ जानकारी नहीं है। जो भी जांच रिपोर्ट आई है वो मुझ तक नहीं पहुंची है। वहीं, कर अधीक्षक निशात अंसारी का जवाब भी दिलचस्प है। कर अधीक्षक का कहना है कि गंगा सभा को पहले ही दुकान आवंटित थी। असलियत यह है कि कई वर्षों से गंगा सभा बिना आवंटन के दुकान पर काबिज थी। इस बीच कोई शुल्क भी नहीं वसूला गया। इस तथ्य की जानकारी जब कर अधीक्षक को दी गई तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि फिलहाल शुल्क वसूली हो रही है। इसके अलावा मुझे कोई जानकारी नहीं है।